सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार माना गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान कृष्ण ने खुद कहा है कि "यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत" यानी जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ता है और मानवता पर संकट आता है, तब-तब वह किसी न किसी रूप में अवतार लेकर बुराई का विनाश करते हैं। भगवान विष्णु के अलग-अलग अवतार लेने के पीछे मात्र असुरों का वध करना ही नहीं था, बल्कि हर युग में मनुष्य को जीवन जीने का एक नया नजरिया देना भी था।
सृष्टि की रक्षा और दशावतार का रहस्य
भगवान विष्णु के 10 प्रमुख अवतार, जिन्हें 'दशावतार' कहा जाता है। आइए यहां इन अवतारों के बारे में जानते हैं -
मत्स्य और कूर्म अवतार
जब प्रलय के समय वेदों की रक्षा करनी थी, तो प्रभु ने मत्स्य अवतार लिया। वहीं, समुद्र मंथन के समय मंदराचल पर्वत को आधार देने के लिए उन्होंने कूर्म यानी कछुआ का रूप धरा था। ये अवतार दिखाते हैं कि जीवन की शुरुआत जल से हुई।
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वराह, नरसिंह और वामन अवतार
पृथ्वी को पाताल से निकालने के लिए वराह और अहंकार से भरे हिरण्यकश्यप के अंत के लिए श्री हरि ने नरसिंह अवतार हुआ। राजा बलि के घमंड को तोड़ने और देवताओं को उनका राज्य वापस दिलाने के लिए प्रभु ने वामन बनकर तीन पग में पूरी सृष्टि नाप ली थी।
परशुराम और श्रीराम अवतार
अत्याचारी क्षत्रियों राजाओं के अंत के लिए परशुराम आए, वहीं मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के रूप में विष्णु जी ने आदर्श पुत्र, पति और राजा की परिभाषा लोगों के सामने प्रकट की। राम अवतार का मुख्य उद्देश्य रावण के अहंकार का अंत और धर्म की मर्यादा स्थापित करना था।
भगवान कृष्ण
जब द्वापर युग में कंस, जरासंध और दुर्योधन जैसे राजाओं के कारण अधर्म अपने चरम पर पहुंच गया था, तब समाज में धर्म की मर्यादा को फिर से स्थापित करने के लिए श्री हरि ने भगवान कृष्ण का अवतार लिया था। उन्होंने यह सिखाया कि धर्म केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि सही मार्ग पर चलना है।
कल्कि अवतार
ऐसा माना जाता है कि जब कलियुग में पाप अपनी चरम सीमा पर होगा, तब भगवान कल्कि के रूप में अवतरित होंगे और कलयुग का अंत कर फिर से सत्ययुग की नींव रखेंगे।
भगवान विष्णु के दशावतार का धार्मिक महत्व
श्री हरि का हर अवतार हमें यह बताता है कि जब भी अन्याय या अधर्म अपनी सीमा पार करेगा, तब न्याय की जीत तय है। यह बुराई पर अच्छाई की विजय का संदेश देता है। दशावतार बताते हैं कि कैसे सतयुग से त्रेता और द्वापर होते हुए हम कलियुग तक पहुंचते हैं। यह मानव को समझाता है कि समय परिवर्तनशील है और हर कठिन समय के बाद एक नई शुरुआत होती है।


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