भगवान विष्णु की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक उसमें तुलसी दल शामिल न हो। लेकिन वहीं एकादशी के दिन तुलसी में जल अर्पित करने या तुलसी को छूने की मनाही होती है।ऐसे में मन में यह सवाल उठता है, कि क्या एकादशी के दिन तुलसी माता की पूजा करनी चाहिए या नहीं। शास्त्रों के मुताबिक अगर आप एकादशी के दिन विशेष विधि-विधान से तुलसी पूजन करते हैं, तो इससे आपको प्रभु श्रीहरि के साथ-साथ माता लक्ष्मी का भी आशीर्वाद मिलता है।
तुलसी पूजन की सही विधि
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तुलसी कृपा के लिए प्रभावशाली मंत्र
पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप आपके फल को कई गुना बढ़ा सकता है -
स्तुति मंत्र: - महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी, आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
2. तुलसी गायत्री: - ॐ तुलसीदेव्यै च विद्महे, विष्णुप्रियायै च धीमहि, तन्नो वृन्दा प्रचोदयात् ।।
3. तुलसी नामाष्टक मंत्र -
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
विष्णु कृपा पाने के विशेष उपाय
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु बिना तुलसी के भोग स्वीकार नहीं करते। इसलिए एकादशी पर उन्हें जो भी अर्पित करें, उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखें। इसके साथ ही एकादशी पर सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास घी का दीपक जलाकर 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और श्री हरि प्रसन्न होते हैं।
तुलसी पूजा में न करें ये गलतियां


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