हिंदू धर्म में शादी को एक पवित्र संस्कार माना जाता है। इस संस्कार की सबसे महत्वपूर्ण रस्म है सप्तपदी यानी सात फेरे और उनके साथ लिए जाने वाले सात वचन। अग्नि को साक्षी मानकर दिए जाने वाले ये वचन पति-पत्नी के जीवन का मार्गदर्शक होते हैं।
अक्सर लोग इन वचनों को ध्यान से नहीं सुन पाते, लेकिन सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इनका मतलब समझना बहुत जरूरी है, तो आइए एस्ट्रोलॉजर चंद्रेश शर्मा जी से जानते हैं कि अग्नि के फेरे लेते समय वर और वधू एक-दूसरे को कौन से सात वचन देते हैं?
विवाह के वो 7 वचन और उनका मतलब
इनके बिना क्यों अधूरा है विवाह?
ये सात वचन असल में एक सफल वैवाहिक जीवन का मंत्र हैं। अगर पति-पत्नी इन वचनों का मतलब समझकर पालन करें, तो आपसी कलह कभी न हो । ये वचन एक-दूसरे को अधिकार नहीं, बल्कि सम्मान देना सिखाते हैं।
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सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि शादी में सात वचन हमारी सनातन परंपरा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये सात वचन वर और वधू को इसलिए बताए जाते हैं क्योंकि वे अब एक नए जीवन के सफर पर निकल रहे हैं। उनके हर कार्य का असर न केवल उन पर, बल्कि उनके परिवारों पर भी पड़ता है।दोनों परिवारों का मान-सम्मान अब उन दोनों के व्यवहार पर ही टिका होता है। ये सातों वचन नए जोड़े के लिए एक रास्ते की तरह हैं।
इसमें उन्हें एक-दूसरे पर भरोसा रखने, प्यार निभाने, धीरज रखने और एक-दूसरे के प्रति समर्पित रहने का वचन दिया जाता है। साथ ही परिवार का ख्याल रखने और खुशहाली के लिए मिलकर साथ चलने का संकल्प दिलाया जाता है। इन वचनों को निभाने से वैवाहिक जीवन खुशहाल रहता है और परिवार की इज्जत भी बढ़ती है।


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