परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद छुरा : विकासखंड छुरा के ग्राम पाट सिवनी में 5 मई को आयोजित शासन के बहुचर्चित सुशासन शिविर में पटवारी पर रिश्वत लेने के आरोप का मामला में अब तक जांच कार्रवाई नहीं होने के चलते क्षेत्र के किसानों में असंतोष व्याप्त है। शिविर के दौरान मंच से ही जिला पंचायत सदस्य लेखराज धुर्वा ने पटवारी हल्का नंबर 31 पर हीराबतर के एक किसान से कथित रूप से 40 हजार रुपये रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगाया था। मामले को लेकर मंच पर मौजूद क्षेत्रीय विधायक रोहित साहू ने कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी न तो किसी प्रकार की जांच शुरू हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई धरातल पर दिखाई दी।इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र के किसानों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब शासन के महत्वपूर्ण कार्यक्रम में सार्वजनिक रूप से रिश्वतखोरी का मामला उठाया गया और जनप्रतिनिधियों के सामने शिकायत हुई, तब भी प्रशासन गंभीर नजर नहीं आ रहा है। इससे लोगों का भरोसा शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कमजोर पड़ने लगा है।
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शिविर के दौरान जिला पंचायत सदस्य लेखराज धुर्वा ने खुले मंच से कहा था कि हल्का नंबर 31 के पटवारी द्वारा हीराबतर के एक किसान से जमीन संबंधी कार्य के एवज में 40 हजार रुपये की मांग की गई और राशि ली भी गई। इस आरोप के सामने आने के बाद मंच पर कुछ देर के लिए माहौल गर्मा गया था। विधायक रोहित साहू ने तत्काल मामले को गंभीर बताते हुए संबंधित अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की बात कही थी।हालांकि, कार्यक्रम को कई दिन गुजर जाने के बावजूद अब तक प्रशासन की ओर से किसी प्रकार की जांच समिति गठित करने या संबंधित पटवारी के खिलाफ कार्रवाई करने की जानकारी सामने नहीं आई है। इससे ग्रामीणों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। किसानों का कहना है कि यदि सार्वजनिक मंच पर लगाए गए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच नहीं होगी तो आम लोगों की शिकायतों का समाधान कैसे होगा।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सुशासन शिविरों में आम जनता अपनी समस्याओं और शिकायतों को लेकर पहुंच रही है, लेकिन शिकायतों पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से इन शिविरों की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिविर केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं, जहां शिकायतें तो सुनी जाती हैं लेकिन समाधान नहीं निकलता।
क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों ने भी प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित पटवारी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि शासन की मंशा और सुशासन शिविर की गरिमा बनी रहे। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर व्यापक जनआक्रोश देखने को मिल सकता है।


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