जनगणना में बदला जिला, ग्रामीण परेशान: सभी दस्तावेजों में सूरजपुर फिर कोरिया कैसे?

जनगणना में बदला जिला, ग्रामीण परेशान: सभी दस्तावेजों में सूरजपुर फिर कोरिया कैसे?

सूरजपुर : राशन कार्ड से लेकर आधार कार्ड और सभी सरकारी दस्तावेजों में जिला सूरजपुर दर्ज हो और एकाएक जनगणना में बताया जाए कि उनका जिला कोरिया है, तो हड़कंप मचना स्वाभाविक है। कुछ इसी तरह का वाकया 20 घरों के निवासियों के साथ हो गया है। ग्रामीण अपना सरकारी दस्तावेज दिखा कर कह रहे कि उनका जिला सूरजपुर है, मगर जनगणना कर्मी मानने को तैयार नहीं हैं। जनगणना कर्मी उल्टा राजस्व रिकॉर्ड दिखा कर बता रहे कि उनका जिला कोरिया है। अब हैरान परेशान ग्रामीणों को समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें।

यह दिलचस्प मामला सूरजपुर जिले के ग्राम करौंदामुड़ा का है। यहां के 20 घरों के परिवारों को समझ नहीं आ रहा है कि वे किस जिले के निवासी हैं? दरअसल, अब तक के सभी सरकारी दस्तावेजों में जिला सूरजपुर ही लिखा है और कभी किसी अधिकारी या सरकारी कर्मचारी ने इस पर आपत्ति नहीं की है। न ही वे किसी काम के लिए कोरिया जिल गए। ग्रामीणों ने अधिकारियों से इसका समाधार करने और सूरजपुर जिले में ही रखने की मांग की है, क्योंकि उनके सभी दस्तावेजों में सूरजपुर दर्ज है।

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सरकारी प्रक्रिया में त्रुटि

इस विवाद के बीच जनगणना का काम प्रभावित हो गया है। जिन 20 घरों के परिवार प्रभावित हुए हैं, उनके सदस्यों ने बताया कि वर्ष 1995 में सरगुजा में जमीन बंदोबस्त का काम चला था। इसके बाद वर्ष 1998 में कोरिया जिला का गठन कर दिया गया। उसी वक्त सरकारी अमले की गलती से जिले की राजस्व की सीमा के निर्धारण में गंभीर त्रुटि कर दी गई। ग्राम करौंदामुड़ा के 20 घरों के साथ लगभग 30 हेक्टेयर भूमि को कोरिया जिले के राजस्व नक्शे में अंकित कर दिया गया। ग्रामीणों का दावा है कि उनके पूर्वज 200 वर्ष से अधिक समय से जिला सरगुजा में निवास थे और फिर सूरजपुर जिले में आए। चाहे मतदान का मामला हो या प्रधानमंत्री आवास योजना का हो, सभी में ग्रामीणों को सूरजपुर जिले से ही लाभ मिल रहा है। राशन दुकान भी सूरजपुर जिले से संचालित हो रही है।

प्रशासन में हड़कंप

मामला तब गरमा गया, जब ग्राम पंचायत करौंदा मुड़ा के सचिव ने सभी घरों की सूची पटवारी को दी। पटवारी सूरजपुर जिले का है, इस कारण उसने प्रभावित 20 घरों को सूरजपुर जिले की जनगणना में शामिल करने से साफ इनकार कर दिया। उसने तर्क दिया कि ये सभी घर कोरिया जिले में हैं और जनगणना कोरिया जिले से ही होगी। घरों की सूची पटवारी को सौंपे जाने पर पटवारी ने इन 20 घरों को कोरिया जिले के नक्शे में होने के कारण जनगणना सूरजपुर जिले में करने से इनकार कर दिया। मामला गरमाने पर भैयाथान तहसीलदार उमेश कुशवाहा खुद ही गांव गए। इसके बाद तहसीलदार ने कोरिया जिले की पटवारी अंजना खलखो को बुलाया और 20 में से 10 घरों को ग्राम सोरंगा जिला कोरिया के नक्शे में होने का हवाला देकर जनगणना शुरू करा दी। इससे ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। वहां पर विरोध प्रदर्शन की नौबत आ गई।

2011 की जनगणना में सूरजपुर ही

ग्रामीणों का कहना है कि 30 वर्ष पहले भी यह मामला उठा था और उस वक्त से लगातार प्रशासन को आवेदन दिए जा रहे हैं, मगर अब तक किसी तरह का समाधान नहीं निकाला गया है। हैरत की बात यह है कि वर्ष 2011 में भी जनगणना में इस गांव को सूरजपुर में ही दर्ज किया गया था, अब फिर से कोरिया जिले में बता कर विवाद पैदा कर दिया गया है। अब ग्रामीणों ने कलेक्टर से इस पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। दूसरी ओर कोरिया प्रशासन को भी इस मामले से अवगत करा कर समाधान करने का अनुरोध किया गया है।








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