चीन ने ट्रंप के सामने खींची ‘लक्ष्मण रेखा’, इन विषयों को बताया नो-एंट्री ज़ोन

चीन ने ट्रंप के सामने खींची ‘लक्ष्मण रेखा’, इन विषयों को बताया नो-एंट्री ज़ोन

 नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के निमंत्रण पर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन की यात्रा पर रहेंगे। वहीं, इस यात्रा के पहले बुधवार को US में मौजूद चीनी दूतावास ने X पर एक पोस्ट किया। जिसमें उन्होंने चीन-अमेरिका संबंधों के प्रमुख मुद्दों पर अपनी स्थिति दोहराई। इसके साथ ही "चार रेड लाइन्स" (सीमाएं) तय की हैं।

जिन्हें इस सप्ताह होने वाले सुपरपावर शिखर सम्मेलन के दौरान चुनौती नहीं देने की बात कही गई है। US में मौजूद चीनी दूतावास के अनुसार, इसमें ताइवान पर चीन की स्थिति और उसके विकास के अधिकार शामिल सहित दो और शर्त शामिल हैं।

दूतावास ने पोस्ट में कहा, "चीन-US संबंधों में चार रेड लाइन्स को चुनौती नहीं दी जानी चाहिए।" इस पोस्ट में एक ग्राफिक भी था, जिसमें ताइवान का मुद्दा, लोकतंत्र और मानवाधिकार, रास्ते और राजनीतिक व्यवस्थाएं और चीन के विकास का अधिकार को बीजिंग के ऐसे मुद्दे बताए गए है, जिन पर कोई समझौता नहीं होगा।

2024 में शी चिनफिंग ने रेड लाइन्स की घोषणा की थी

इसके साथ ही X पर एक अन्य पोस्ट में, दूतावास ने इस बात पर जोर दिया कि "चीन और US को एक रणनीतिक, रचनात्मक और स्थिर चीन-US संबंध बनाने की दिशा में काम करना चाहिए।"

अपनी व्यापक कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत करते हुए, दूतावास ने आगे कहा कि "आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और आपसी फायदे वाला सहयोग ही चीन और US के बीच अच्छे संबंध बनाए रखने का सही तरीका है।"चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने नवंबर 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात के बाद एक बयान में पहली बार इन चार रेड लाइन्स की घोषणा की थी।

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ट्रंप ने 11 बिलियन डॉलर के हथियार पैकेज की घोषणा की थी

चीन, लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को अपना ही क्षेत्र मानता है। इसलिए, चीन ने बुधवार को ताइवान को US द्वारा हथियारों की बिक्री का कड़ा विरोध दोहराया और बीजिंग में शिखर सम्मेलन के लिए US राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के आगमन से पहले वाशिंगटन से अपने वादों का पालन करने का आग्रह किया।

चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय की प्रवक्ता झांग हान ने कहा कि, ताइवान एक आंतरिक मुद्दा है और यह चीनी लोगों का अपना मामला है। उन्होंने आगे कहा, "हम US द्वारा चीन के ताइवान क्षेत्र के साथ किसी भी प्रकार के सैन्य संबंध बनाने का कड़ा विरोध करते हैं, और हम US द्वारा चीन के ताइवान क्षेत्र को हथियार बेचने का भी कड़ा विरोध करते हैं।

यह हमारी एक सुसंगत और स्पष्ट स्थिति है।" बता दें कि, दिसंबर में ट्रंप प्रशासन ने ताइवान के लिए $11 बिलियन डॉलर के हथियार पैकेज की घोषणा की थी, जो अब तक का सबसे बड़ा पैकेज था।

बीजिंग की अन्य आंतरिक मामले

चीन लोकतंत्र और मानवाधिकारों की चिंताओं की आड़ में अपने आंतरिक मामलों में US के हस्तक्षेप का भी विरोध करता रहा है। वह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में अपनी समाजवादी व्यवस्था का बचाव करता है। चीन द्वारा रेयर-अर्थ के निर्यात पर नियंत्रण, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) में प्रतिद्वंद्विता, और दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण व्यापारिक संबंध भी उन विषयों में शामिल हैं।

जिन पर दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुखों के बीच चर्चा होने की उम्मीद है। चीन पश्चिमी प्रतिबंधों के खिलाफ सक्रिय रूप से दांव-पेच चल रहा है; उसने 2021 के अपने 'ब्लॉकिंग नियमों' को सक्रिय कर दिया है, ताकि घरेलू कंपनियों को US के दंडों (विशेष रूप से ईरानी कच्चे तेल के आयात से जुड़े दंडों) को नजर अंदाज करने के लिए बाध्य किया जा सके।

9 साल बाद ट्रंप की चीन यात्रा

ट्रंप चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मिलने के लिए बीजिंग के रास्ते में हैं। यह दो-दिवसीय यात्रा 2017 में ट्रंप की यात्रा के बाद पहली यात्रा है, जब चीनी राष्ट्रपति के साथ उच्च-स्तरीय वार्ता एक बार फिर होगी। इस यात्रा का कार्यक्रम बेहद व्यस्त है, जिसमें एक राजकीय भोज और एक चाय-समारोह भी शामिल है।

ट्रंप चीन की ओर ऐसे समय में बढ़ रहे हैं, जब टैरिफ (शुल्क) पर अदालती फैसलों के कारण उनकी महत्वाकांक्षाओं को झटका लगा है; इसके चलते उनके लक्ष्य अब केवल बीन्स, बीफ और बोइंग जेट्स से जुड़े कुछ सौदों तक ही सीमित रह गए हैं।








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