“सड़क पर नमाज बर्दाश्त नहीं… मान जाइए वरना सरकार के पास और भी रास्ते” — CM योगी का सख्त संदेश

“सड़क पर नमाज बर्दाश्त नहीं… मान जाइए वरना सरकार के पास और भी रास्ते” — CM योगी का सख्त संदेश

बकरीद (ईद-उल-अज़्हा) 2026 से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( CM Yogi Adityanath) ने सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है।

लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यूपी में सड़कों पर नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी और सार्वजनिक रास्तों को किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

सीएम योगी ने कहा कि सड़कें आम लोगों के आने-जाने के लिए होती हैं। कोई भी व्यक्ति या समूह सड़क रोककर धार्मिक गतिविधियां नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर लोग नियमों को प्यार से मान लें तो अच्छी बात है, लेकिन अगर कोई कानून तोड़ने की कोशिश करेगा तो सरकार के पास दूसरे तरीके भी मौजूद हैं।

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब बकरीद यानी ईद-उल-अज़्हा 2026 की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हर साल कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग ईद की नमाज अदा करते हैं और कुछ जगहों पर सड़कें भी जाम हो जाती हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार पहले से ही सख्ती का संदेश देना चाहती है। यह बयान बकरीद (27 मई 2026 के आसपास) से पहले आया है, जब आमतौर पर बड़े पैमाने पर नमाज की तैयारी होती है। सरकार का साफ संदेश है, सड़क जाम नहीं चलेगा।

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योगी सरकार का सख्त स्टैंड: क्यों और कैसे?

योगी आदित्यनाथ ने बार-बार कहा है कि सड़कें धार्मिक आयोजनों के लिए नहीं बनी हैं। उनके अनुसार:

  • सड़कें यातायात के लिए हैं।
  • धार्मिक अनुशासन हर समुदाय को दिखाना चाहिए।
  • महाकुंभ जैसे आयोजनों में करोड़ों श्रद्धालुओं ने बिना किसी व्यवधान के अनुशासन बनाए रखा, यही मिसाल दूसरों को सीखनी चाहिए।

 

सीएम ने कहा कि अगर प्यार से बात मान ली जाए तो ठीक, वरना कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। कई जिलों में पहले से ही प्रशासन ने चेतावनी जारी कर दी है कि सड़कों पर नमाज पढ़ने पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।

यूपी में बदलाव की कहानी

पिछले सालों में यूपी के कई शहरों (मेरठ, सहारनपुर, लखनऊ आदि) में सड़कों पर नमाज पढ़ने से यातायात जाम होता था। आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, दफ्तर जाने वालों और इमरजेंसी सेवाओं को परेशानी होती थी। योगी सरकार ने आते ही इस पर लगाम कसी:

  • नमाज केवल मस्जिदों या निर्धारित ईदगाहों पर।
  • लाउडस्पीकर पर अजान की आवाज मस्जिद के अंदर तक सीमित।
  • सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी धार्मिक आयोजन से यातायात बाधित नहीं होना चाहिए।
  • बकरीद पर कुर्बानी भी केवल निर्धारित जगहों पर।

सरकार का तर्क है कि कानून सबके लिए समान है। हिंदू त्योहारों (कुंभ, शिवरात्रि, रथ यात्रा आदि) में भी सड़क जाम की शिकायतें आती हैं, लेकिन अनुशासन बनाए रखा जाता है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख

उत्तर प्रदेश में यह नीति सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि अदालती दृष्टिकोण से भी समर्थित है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई बार साफ कहा है कि सार्वजनिक सड़कों या पार्कों पर नमाज पढ़ने का अधिकार नहीं है। धार्मिक स्वतंत्रता का मतलब सार्वजनिक सुविधाओं का दुरुपयोग नहीं है।

बकरीद 2026 के लिए तैयारी

बकरीद 2026 (संभावित 27 मई) को देखते हुए सभी जिलों के DM और SP को निर्देश दिए गए हैं:

  • निर्धारित ईदगाहों और मस्जिदों में पर्याप्त व्यवस्था।
  • अतिरिक्त नमाज के लिए वैकल्पिक जगहों का चयन।
  • यातायात पुलिस को अलर्ट।
  • किसी भी तरह की भीड़ या जाम पर तुरंत एक्शन।
  • कुर्बानी के लिए भी निर्देशित स्लॉटर हाउस या जगहें।

बड़े शहरों में स्थिति

लखनऊ, कानपुर, मेरठ, गाजियाबाद, अलीगढ़, सहारनपुर जैसे शहरों में पहले सड़क नमाज आम थी। अब प्रशासन सख्ती बरत रहा है। पुलिस और स्थानीय प्रशासन पहले से ही समुदाय के नेताओं से बात कर रहे हैं।

योगी का व्यापक संदेश

यह बयान सिर्फ एक त्योहार तक सीमित नहीं है। यह यूपी में 'कानून का राज' और 'सार्वजनिक अनुशासन' की नीति का हिस्सा है। सीएम अक्सर कहते हैं कि उत्सव है, उपद्रव नहीं। महाकुंभ 2025 का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि करोड़ों लोग आए, स्नान किया, चले गए, बिना किसी गड़बड़ी के। यही धार्मिक अनुशासन हर समुदाय में होना चाहिए।

व्यवस्था बनाम अराजकता

सीएम योगी का यह सख्त बयान यूपी में बदलते शासन की तस्वीर पेश करता है। सरकार का फोकस है कि सभी के लिए सुगम यातायात, शांति और समान नियम। भक्तों और आम नागरिकों से अपील है कि निर्धारित स्थलों का सम्मान करें, ताकि किसी को परेशानी न हो। बकरीद का त्योहार शांति से मनाया जाए, यही सबकी कामना है।








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