अधिक मास में प्रत्येक तिथि का अपना विशेष महत्त्व है। शास्त्रों में इस मास की प्रत्येक तिथि का पालन पुण्यदायी माना गया है। अधिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी भी अत्यंत महत्वपूर्म मानी जाती है। मुद्गलपुराण में अधिक मास की शुक्ल चतुर्थी को वरदा चतुर्थी के रूप में वर्णित किया गया है। जिस प्रकार सामान्य मासों में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विघ्नविनाशक भगवान गणेश का पूजन होता है, उसी प्रकार अधिक मास की चतुर्थी को भी गणेश पूजन का विधान है। अधिक मास में किए गए गणेश पूजन का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
वरदा विनायक चतुर्थी व्रत पूजा विधि
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वरदा चतुर्थी शुभ मुहूर्त
गणेश जी पूजा मंत्र

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