डायबिटीज में ओट्स या दलिया? ज्यादातर लोग करते हैं गलती, जानिए कौन है ब्लड शुगर का असली दुश्मन और दोस्त!

डायबिटीज में ओट्स या दलिया? ज्यादातर लोग करते हैं गलती, जानिए कौन है ब्लड शुगर का असली दुश्मन और दोस्त!

डायबिटीज एक बहुत कॉमन बीमारी बन चुकी है। ये बीमारी बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चों में भी काफी आम होती जा रही है। इस बीमारी में ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। अगर इसे कंट्रोल में न रखा जाए तो मरीज की जान भी जा सकती है। ऐसे में डायबिटीज के मरीजों को अपने खान-पान का खास ध्यान रखने की जरूरत होती है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को ब्रेकफास्ट में भी ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए जो उनका ब्लड शुगर न बढ़ने दे। ऐसे में अक्सर लोगों के बीच इस बात की कंफ्यूजन रहती है कि नाश्ते में ओट्स या दलिया क्या खाना बेस्ट होता है। चलिए जानते हैं। 

ग्लाइसेमिक इंडेक्स और ब्लड शुगर

डायबिटीज में वही चीजें खानी चाहिए जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम हो, ताकि ब्लड शुगर अचानक न बढ़े। दलिया का ग्लाइसेमिक इंडेक्स लगभग 51 से 55 के बीच होता है। यह एक 'लो-जीआई' फूड है, जो धीरे-धीरे पचता है और शुगर को कंट्रोल में रखता है। वहीं ओट्स का जीआई इस बात पर निर्भर करता है कि वह कैसा है। स्टील-कट ओट्स का जीआई कम लगभग 53 होता है, लेकिन इंस्टेंट या फ्लेवर्ड ओट्स का जीआई 65 से ऊपर जा सकता है, जो शुगर बढ़ा सकता है। ओट्स में 'बीटा-ग्लुकन' नाम का एक खास सॉल्युबल फाइबर होता है। यह शरीर में इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधारता है और बैड कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है। जबकि दलिया में इनसॉल्युबल फाइबर ज्यादा होता है, जो पाचन तंत्र और पेट को साफ रखने के लिए बेहतरीन है।

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आपके लिए क्या है बेस्ट?
डायबिटीज में दोनों ही अपनी-अपनी जगह बेस्ट हैं। अगर आप ओट्स चुन रहे हैं तो पैकेट वाले 'इंस्टेंट' या 'मसाला ओट्स' से दूर रहें। हमेशा स्टील-कट ओट्स या रोल्ड ओट्स ही खाएं। अगर आप दलिया चुन रहे हैं तो यह एक नेचुरल और अनप्रोसेस्ड विकल्प है, जिसे आप बेझिझक अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। 







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