28 मई को गुरुवार है इसलिए ये गुरु प्रदोष व्रत कहलाएगा। इस व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार गुरु प्रदोष व्रत रखने से जीवन में सुख-समृद्धि की कभी कमी नहीं होती। इतना ही नहीं ये व्रत मोक्ष की भी प्राप्ति कराता है। इस व्रत की मुख्य पूजा प्रदोष काल के समय की जाती है। इस मुहूर्त में श्रद्धालु भगवान शिव की विधि विधान पूजा करने के बाद कथा का श्रवण करते हैं। चलिए आपको बताते हैं गुरु प्रदोष व्रत की पूजा विधि और मुहूर्त।
गुरु प्रदोष व्रत मुहूर्त 2026
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गुरु प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष व्रत में क्या खा सकते हैं?
प्रदोष व्रत कोई फलाहारी रहता है तो कोई एक समय भोजन करके ये व्रत रखता है। अगर आप फलाहारी व्रत रहते हैं तो दिन भर सिर्फ फल या व्रत वाली चीजों का ही सेवन कर सकते हैं। वहीं अगर आप ये व्रत एक समय भोजन करके रखते हैं तो शाम की पूजा के बाद आप सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं।

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