बेमेतरा टेकेश्वर दुबे :कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता, गति एवं सुगमता लाने के उद्देश्य से जिले के सभी विभागों में ई-ऑफिस प्रणाली को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अब से सभी विभागीय पत्राचार एवं फाइलों का संचालन ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से ही किया जाएगा।कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शासन की मंशानुसार डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देना आवश्यक है। कागजी फाइलों के स्थान पर डिजिटल प्रणाली अपनाने से कार्यों के निष्पादन में तेजी आएगी, फाइलों के रख-रखाव में सुविधा होगी तथा समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि ई-ऑफिस प्रणाली से विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
“सुशासन तिहार” में प्राप्त आवेदनों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण पर जोर
बैठक में कलेक्टर ने “सुशासन तिहार” के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों की विभागवार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आवेदनों के निराकरण में केवल औपचारिकता पूरी न की जाए, बल्कि प्रत्येक प्रकरण का वास्तविक एवं गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि शासन की मंशा आम जनता की समस्याओं का त्वरित, प्रभावी एवं संवेदनशील निराकरण करना है। इसलिए आवेदनों को केवल नस्तीबद्ध करने के बजाय आवेदक की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित अधिकारी स्वयं मौके पर जाकर जांच करें और नियमानुसार त्वरित राहत उपलब्ध कराएं।
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समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश
कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने कहा कि सुशासन की पहली शर्त समयबद्धता है। सभी विभागों को निर्देशित किया गया कि उन्हें प्राप्त आवेदनों एवं लंबित प्रकरणों का निराकरण निर्धारित समय-सीमा के भीतर किया जाए, ताकि आम नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी विभाग द्वारा लापरवाही बरती जाती है अथवा बिना ठोस कारण के प्रकरण लंबित रखे जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
लंबित प्रकरणों के गुणवत्तापूर्ण निराकरण के निर्देश
कलेक्टर ने समय-सीमा के लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों से कहा कि जनता से जुड़े मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकरण का निराकरण केवल फाइल बंद करने तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसा समाधान हो जिससे आवेदक संतुष्ट हो सके। उन्होंने विभिन्न विभागों के लंबित मामलों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए तथा कार्यों में किसी भी प्रकार की लेटलतीफी एवं उदासीनता पर नाराजगी व्यक्त की। कलेक्टर ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी। कलेक्टर के इस सख्त एवं संवेदनशील रुख से प्रशासनिक कार्यप्रणाली में और अधिक कसावट आने के साथ ही आम जनता का सरकारी व्यवस्था पर विश्वास और मजबूत होगा।

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