स्ट्रे डॉग्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, चीफ सिकरेट्री को देना होगा शपथ पत्र

स्ट्रे डॉग्स मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, चीफ सिकरेट्री को देना होगा शपथ पत्र

बिलासपुर: आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के हाई कोर्ट को जरुरी दिशा निर्देश जारी किया है। देशभर के चीफ सिकरेट्री को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन के संबंध में हाई कोर्ट में शपथ पत्र के साथ जानकारी देनी होगी। हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल रिपोर्ट को कंपाइल कर सुप्रीम कोर्ट भेजेंगे। इसी तरह के एक मामले में 26 मई को वेकेशन कोर्ट में सुनवाई हुई। हाई कोर्ट ने चीफ सिकरेट्री को शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। याचिका की सुनवाई 30 जून को होगी।

देशभर के हाई कोर्ट को सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

निरंतर अनुपालन और निगरानी के उद्देश्य से, सभी उच्च न्यायालयों को निर्देश दिया जाता है कि वे "सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) संख्या 5/2025 में जारी निर्देशों के अनुपालन के संबंध में" नाम और शैली में एक स्वतः संज्ञान रिट याचिका पंजीकृत करें, जो इस न्यायालय द्वारा 22 अगस्त, 2025 और 7 नवंबर, 2025 के आदेशों के माध्यम से जारी निर्देशों के अनुपालन की निगरानी के लिए एक निरंतर परमादेश के रूप में कार्य करेगी, वर्तमान आदेश में निहित निर्देशों के अतिरिक्त, और इसे संबंधित उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष रखा जाएगा और, जहां तक संभव हो, उस पर विचार किया जाएगा।

देशभर के हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को आदेश की कॉपी भेजने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सर्वाच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को निर्देश दिया है, इस आदेश की एक प्रति, साथ ही 11 अगस्त, 2025, 22 अगस्त, 2025 और 7 नवंबर, 2025 के आदेशों की एक प्रति, सभी अधिकार क्षेत्रीय उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरलों को तत्काल भेजे, ताकि उनमें जारी निर्देशों का प्रभावी अनुपालन, कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

देश के परिपालन में लापरवाही बरतना पड़ेगा भारी

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है, यह स्पष्ट किया जाता है कि इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों, जिनमें 22 अगस्त, 2025, 7 नवंबर, 2025 के आदेश और वर्तमान आदेश में निहित निर्देश शामिल हैं, का लगातार पालन न करने या जानबूझकर उनका अनुपालन न करने पर नगर विभाग के दोषी अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित विभागों के अधिकारी उचित दंड के लिए उत्तरदायी होंगे,विधि के अनुसार कार्यवाही की जाएगी।

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दोषी अधिकारियों पर चलेगा अवमानना की कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है, संबंधित उच्च न्यायालय, इस आदेश के अनुसार निगरानी करते समय, इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों का पालन न करने, निष्क्रियता बरतने या जानबूझकर अवहेलना करने वाले दोषी अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना ​​कार्यवाही शुरू करने सहित उचित कार्रवाई करने के लिए पूर्ण रूप से सशक्त होंगे।

केंद्र सरकार और एनएचएआई को ये दिया निर्देश

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के सचिव 7 अगस्त, 2026 को या उससे पहले अपने संबंधित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालयों के समक्ष अनुपालन संबंधी अद्यतन हलफनामे दाखिल करेंगे। इसी प्रकार, भारत सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भी अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले क्षेत्रों के संबंध में उपर्युक्त अवधि के भीतर अपने-अपने क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालयों के समक्ष अनुपालन संबंधी हलफनामे दाखिल करेंगे, जिसमें इस न्यायालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुपालन में उठाए गए उपायों को स्पष्ट रूप से दर्शाया जाएगा।

स्वत: संज्ञान वाली जनहित याचिका के रूप में हाई कोर्ट करे सुनवाई

इस न्यायालय की रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह सभी स्थानांतरित मामलों, आवेदनों के अभिलेखों को संबंधित क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालयों को तुरंत भेज दे, और इस प्रकार भेजे गए मामलों को उचित रूप से टैग किया जाए और उपरोक्त निर्देश के अनुसार उच्च न्यायालयों द्वारा पंजीकृत की जाने वाली स्वतः संज्ञान रिट याचिका के साथ सुना जाए।

हर चौथे महीने सुप्रीम कोर्ट भेजनी होगी रिपोर्ट

उच्च न्यायालय, अपने-अपने रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से, प्रत्येक चार माह में एक समेकित रिपोर्ट संकलित करके इस न्यायालय को भेजेंगे, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अनुपालन की स्थिति, प्राप्त प्रगति, पहचानी गई सर्वोत्तम प्रथाओं और नीतिगत या न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता वाले निरंतर अंतरालों का सारांश होगा। ऐसी पहली समेकित रिपोर्ट अगली सुनवाई की तारीख, यानी 17 नवंबर, 2026 से कम से कम एक सप्ताह पहले इस न्यायालय के समक्ष अभिलेख में रखी जाएगी।

शपथ पत्र के साथ राज्य सरकार को देनी होगी रिपोर्ट

राज्य को शपथपत्र दाखिल कर यह बताना होगा, सर्वोच्च न्यायालय के स्वतः संज्ञान याचिका में दिए गए निर्देशों का अनुपालन करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका की सुनवाई के लिए 30 जून 2026 की तिथि कोर्ट ने तय कर दी है।

पढ़िए सुप्रीम कोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान क्या कहा है?

सर्वोच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान रिट याचिका की सुनवाई के दौरान कहा है, इस न्यायालय द्वारा दिन-प्रतिदिन अनुपालन के संबंध में अखिल भारतीय निगरानी अभ्यास न केवल प्रशासनिक रूप से बोझिल और समय लेने वाला होगा, बल्कि स्थिति की मांग के अनुसार जवाबदेही और प्रभावशीलता का स्तर भी प्राप्त नहीं कर पाएगा। दूसरी ओर, उच्च न्यायालयों को निगरानी की जिम्मेदारी सौंपने से स्थानीय परिस्थितियों के साथ घनिष्ठ जुड़ाव, समय पर सुधारात्मक हस्तक्षेप और जारी किए गए निर्देशों का अधिक प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित होगा, साथ ही प्रत्येक राज्य और क्षेत्र की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप संदर्भ-संवेदनशील उपायों के निर्माण को भी सक्षम बनाया जा सकेगा। इस पृष्ठभूमि में, और प्रभावी, निरंतर और परिणाम-उन्मुख सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के कार्यान्वयन के लिए जरुरी दिशा निर्देश जारी किया जाता है।

पढ़िए हाई कोर्ट में क्या आया मामला?

धीरज पारधी ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बताया है,कुत्ते के काटने से उसके बेटे की मौत हो गई है। याचिकाकर्ता ने बेटे की मौत पर क्षतिपूर्ति मुआवजा के रूप में चार लाख रुपये की मांग की है। राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता आरके गुप्ता ने पैरवी की। एडिशनल एजी ने हाई कोर्ट को बताया, कुत्ता काटने से मुआवजा देने का प्रावधान नहीं है। याचिका की सुनवाई जस्टिस एनके व्यास के सिंगल बेंच में हुई। कोर्ट ने चीफ सिकरेट्री को शपथ पत्र के साथ जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों के प्रबंधन को लेकर जारी गाइड लाइन के परिपालन के संबंध में विस्तार से जानकारी देने का निर्देश दिया है।







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