बिलासपुर DEO कार्यालय में बड़ा खेला: अनुकंपा नियुक्ति से लेकर पदोन्नति तक नियमों की उड़ाई धज्जियां

बिलासपुर DEO कार्यालय में बड़ा खेला: अनुकंपा नियुक्ति से लेकर पदोन्नति तक नियमों की उड़ाई धज्जियां

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ बिलासपुर के डीईओ कार्यालय में मनमानी और राज्य सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाने और अपनो को उपकृत करने का बड़ा खेला चल रहा है। अनुकंपा नियुक्ति में फर्जीवाड़े की फाइल ना जाने कहां दबा दी गई और फर्जीवाड़ा करने वाले क्लर्क को डीईओ से लेकर जेडी कार्यालय के अफसरों का ऐसा संरक्षण मिला है, अब वे कार्यालय के दूसरे कर्मचारियों की शिकायतबाजी करने लगे हैं। दस्तावेजी प्रमाण के बाद जेडी कार्यालय से शिकायत तो दूर फाइल ही दबा दी गई।

अनुकंपा नियुक्ति में घोटाले के बाद एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। पदोन्नति में डीईओ कार्यालय ने गजब कर दिया है। राजपत्र और राज्य सरकार के नोटिफिकेशन का सीधेतौर पर अवहेलना कर दी है। डीपीसी में जिन अधिकारियों को बैठाने का प्रावधान है, उससे अलग जाकर डीईओ ने दो और लोगों को शामिल कर लिया। इसके पीछे की मंशा क्या है, उसे तो वही जाने, सवाल यह उठ रहा है, गजट नोटिफिकेशन के बाद राज्य सरकार कीअधिसूचना में जिन नियमों व शर्तों का पालन करने की साफतौर पर हिदायत दी गई है, उसे दरकिनार कर डीपीसी बुलाई और पदोन्नति का पूरा खेला कर दिया गया।

पढ़िए क्या है डीपीसी का नियम व शर्तें

सहायक ग्रेड दो से सहायक ग्रेड के पद पर पदोन्नति से पहले होने वाली डीपीसी में बतौर अध्यक्ष डीपीआई या उनके द्वारा नामांकित अधिकारी,सदस्य के रूप में उप संचालक लोक शिक्षण संचालनालय,सदस्य सचिव के रूप में सहायक संचालक स्थापना। राज्य शासन ने गजट नोटिफिकेशन में कुछ इस तरह की शर्तें रखी है। डीईओ कार्यालय बिलासपुर में सहायक ग्रेड दाे से सहायक ग्रेड एक के पद पर पदोन्नति के लिए जब डीपीसी की बैठक रखी गई तब इन तीनों अधिकारियों के अलावा डीईओ ने दो प्रिंसिपल को भी शामिल करा लिया। अचरज की बात ये, डीपीसी में जिन क्लर्क को ग्रेड वन के पद पर पदोन्नति दी गई है, उनमें डीपीसी के तीन नामित मेंबर्स के अलावा दोनों प्रिंसिपल के भी हस्ताक्षर हैं। इसे लेकर डीपीसी की वैधता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। गजट नोटिफिकेशन के विपरीत बुलाई गई डीपीसी की कानूनी वैधता कितनी है।यह भी चर्चा है, राज्य सरकार के नियमों व निर्देशों की जिस तरह अवहेलना की गई है, इसे लेकर अब कानूनी विवाद की स्थिति भी बनने लगी है।

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एक और बड़ी गड़बड़ी

पदोन्नति से पहले होने वाली डीपीसी के नियमों व शर्तों पर नजर डालें तो जिस पद के लिए डीपीसी होनी है, उसमें एक अनुपात तीन में कर्मचारियों के नाम को शामिल किया जाता है। अचरज की बात ये, बिलासपुर में जो डीपीसी हुई उसमें प्रमोशन के लिए एकमात्र कर्मचारी के नाम को शामिल किया गया। सवाल यह है, डीपीसी की जरुरत ही क्यों पड़ गई। जब इकलौते कर्मचारी को ही पदोन्नति देनी थी तब डीपीसी क्यों बुलाई गई।डीपीसी ने सिंगल नाम वाली प्रक्रिया का विरोध क्यों नहीं किया। किन मापदंडों और प्रक्रिया के तहत डीपीसी ने एक नाम को पदोन्नति के लिए अनुशंसा कर दी है।

पढ़िए क्या है नियम

जिस विभाग के कर्मचारियों को पदोन्नति दी जाती है, उसके पहले विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक होती है, उसमे एक अनुपात तीन में संंबंधित कर्मचारियों के नाम को शामिल किया जाता है। वरिष्ठता क्रम में कर्मचारियों के नाम की सूची बनाई जाती है। पांच साल का गोपनीय चरित्रावली, अचल संपत्ति का पूरा लेखा जाेखा डीपीसी के सामने जाता है। किसी कर्मचारी के खिलाफ कोई कार्रवाई चल रही है तो उनके नाम का लिफाफा बंद कर रख दिया जाता है, साथ ही एक पद भी रिक्त रखा जाता है। डीईओ कार्यालय ने ऐसा कुछ नहीं किया। मर्जी के अनुसार डीपीसी बुलाई और पदोन्नति दे दी गई।

जूनियर को दे दी पदोन्नति

बिलासपुर जिले में सहायक ग्रेड-02 के पद पर सबसे वरिष्ठ विकास तिवारी हैं। उनकी नियुक्ति 26 अक्टूबर1987 की है. जन्मतिथि 26.नवंबर.1966 की है। जीएन.द्विवेदी की नियुक्ति 26.अक्टूबर.1987 है एवं जन्म वर्ष 1067 है। जिले की वरिष्ठता क्रम में विकास तिवारी से द्विवेदी नीचे है। सहायक ग्रेड-01 का पद 30 जून 2025 से रिक्त हो गया था।

अपनो को उपकृत करने ऐसे शुरू हुआ खेला

विकास तिवारी ने जेडी को लिखे में बताया है, 23.मार्च 2026 को बिना सूचना के लम्बी अवधि से अनुपस्थित होने का आरोप लगाते हुए उसे निलंबित कर दिया। निलंबन के पूर्व बचाव का अवसर या स्पष्टीकरण लेना उचित नहीं समझा गया. जो नियमानुसार गलत है। 23.सितंबर 2025 को जिला शिक्षा अधिकारी को आवेदन पत्र के माध्यम से अवगत करा दिया गया था कि स्वास्थ्य ठीक नहीं है. स्वास्थ्य ठीक होने पर स्थानांतरित संस्था शा.उ.मा.शा.लोहर्सी सोन में कार्यभार ग्रहण करूँगा। उक्त पत्र की भी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा अनदेखी की गई।

विकास तिवारी ने लिखा है, निलंबन के तत्काल पश्चात् 03.फरवरी 2026 को जीएन. द्विवेदी को पदोन्नति सहायक ग्रेड-01 के पद पर दे दी गई। जबकि सहा. ग्रेड.-01 का पद 30.जून 2025 से रिक्त हो गया था। पदोन्नति के पश्चात् मेरे से आवेदन लिया गया की स्वास्थ्यगत कारणों से कार्यभार नहीं किया गया। पुनः इस तरह की त्रुटि नहीं होगी मेरे द्वारा भी अपने हितोंको ध्यान देते हुए जिला शिक्षा अधिकारी को आवेदन दे दिया। आवेदन के तत्काल दूसरे दिन 13 मार्च.2026 को एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकते हुए निलंबन काल का समस्त प्रयोजनों का निराकरण विभागीय जांच उपरांत करने का आदेश जारी कर दिया। शिकायत में लिखा है निलंबन आदेश गलत है, यदि जांच की जा रही है तो जांच उपरांत सजा दी जानी थी। यदि वेतनवृद्धि रोक दी गई तो जांच नहीं की जानी थी।







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