50 साल बाद भी विकास से अछूता सुखरीडबरी,भुंजिया जनजाति का गांव आज भी सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

50 साल बाद भी विकास से अछूता सुखरीडबरी,भुंजिया जनजाति का गांव आज भी सड़क, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित

 

राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं, सरकारी योजनाओं का लाभ भी अधूरा

 

परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद  :गरियाबंद जिले के घने जंगलों के बीच बसे विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति के गांव सुखरीडबरी की तस्वीर आज भी विकास के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। आजादी के करीब आठ दशक बाद भी यह गांव सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। लगभग 30 परिवारों की आबादी वाला यह गांव पिछले 50 से 60 वर्षों से अस्तित्व में है, लेकिन आज तक इसे राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिल पाया है। परिणामस्वरूप यहां के ग्रामीण कई सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।गांव तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात के मौसम में कच्चा रास्ता दलदल में बदल जाता है, जिससे गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग कट जाता है। ग्रामीणों को राशन, इलाज और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

मानसिक रूप से बीमार बेटे की देखभाल में संघर्षरत मां
गांव की निवासी अग्नि बाई भुंजिया अपने बेटे महेश भुंजिया की स्थिति बताते हुए भावुक हो जाती हैं। उनका कहना है कि जन्म के बाद शुरुआती पांच वर्षों तक महेश पूरी तरह सामान्य था, लेकिन बीमारी के बाद उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई। आज हालत यह है कि उसे दिनभर निगरानी में रखना पड़ता है। परिवार के लोग बाहर जाते हैं तो उसे रस्सी से बांधकर जाना पड़ता है ताकि वह कहीं भटक न जाए।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि आज तक महेश का न तो आधार कार्ड बन पाया है और न ही राशन कार्ड। इससे वह कई सरकारी सुविधाओं से वंचित है और परिवार को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

स्कूल है, लेकिन भवन नहीं
शिक्षा व्यवस्था भी गांव की बड़ी समस्या बनी हुई है। गांव में प्राथमिक विद्यालय संचालित तो है, लेकिन भवन के अभाव में पिछले लगभग दस वर्षों से अतिरिक्त भवन में कक्षाएं लगाई जा रही हैं। पांचवीं कक्षा के बाद बच्चों को आगे की पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता है। बरसात के दिनों में खराब रास्तों के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है और कई बार उन्हें स्कूल तक पहुंचना भी मुश्किल हो जाता है।

ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है

पानी, राशन और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए लंबा संघर्ष
ग्रामीणों के अनुसार गांव में पीने और दैनिक उपयोग के पानी की समस्या लगातार बनी हुई है। सामुदायिक भवन नहीं होने के कारण ग्राम सभा और सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में भी दिक्कत होती है।
राशन लेने के लिए ग्रामीणों को लगभग तीन किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जबकि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए करीब दस किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। आपातकालीन स्थिति में यह दूरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।"बरसात में रास्ता पूरी तरह बंद हो जाता है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। राशन और इलाज के लिए दूर-दूर जाना पड़ता है। गांव में सड़क, पानी और सामुदायिक भवन की सबसे ज्यादा जरूरत है।" — ग्रामीण, सुखरीडबरी

करोड़ों की योजना अधूरी, भ्रष्टाचार के आरोप
ग्रामीण बताते हैं कि लगभग दस वर्ष पहले तत्कालीन कलेक्टर श्याम धावड़े ने सुखरीडबरी को गोद ग्राम के रूप में विकसित करने के लिए करोड़ों रुपये की परियोजना स्वीकृत कराई थी। कुछ विकास कार्य हुए भी, लेकिन अधिकांश योजनाएं अधूरी रह गईं।ग्रामीणों का आरोप है कि कई विकास कार्य भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए, जिसके कारण आज भी गांव की मूलभूत समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। गांव में अधूरी परियोजनाएं और अधूरा विकास प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहे हैं।

सरकारी योजनाओं से वंचित ग्रामीण
राजस्व ग्राम का दर्जा नहीं मिलने के कारण गांव के कई परिवार आज भी पेंशन, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, किसान हितग्राही योजनाओं और अन्य सरकारी लाभों से वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन से मांग करने के बावजूद अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।

फैक्ट फाइल : सुखरीडबरी
🔹 जनजाति – विशेष पिछड़ी भुंजिया जनजाति
🔹 परिवार – लगभग 30
🔹 बसाहट – 50-60 वर्ष पुरानी
🔹 राजस्व ग्राम का दर्जा – नहीं
🔹 राशन दुकान की दूरी – लगभग 3 किमी
🔹 स्वास्थ्य सुविधा की दूरी – लगभग 10 किमी
🔹 प्राथमिक स्कूल – संचालित, लेकिन भवन नहीं
🔹 सामुदायिक भवन – नहीं
🔹 मुख्य समस्या – सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक सुविधाओं का अभाव

बड़ा सवाल
जब विशेष पिछड़ी जनजातियों के विकास के लिए सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो आखिर सुखरीडबरी जैसे गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए क्यों तरस रहे हैं? क्या विकास की योजनाएं कागजों तक सीमित हैं, या जिम्मेदारों की उदासीनता इसका कारण है?







You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments