अखंड सौभाग्य का महापर्व: 29 जून को वट सावित्री पूर्णिमा, सुहागिनें अभी नोट कर लें शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय

अखंड सौभाग्य का महापर्व: 29 जून को वट सावित्री पूर्णिमा, सुहागिनें अभी नोट कर लें शुभ मुहूर्त और पूजा का सही समय

अमावस्या बीतने के साथ ही लोग पूर्णिमा का इंतजार करने लगते हैं। हिंदू धर्म में पूर्णिमा को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने और स्नान-दान के लिहाज से भी काफी अहम माना जाता है। खासकर ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा का अपना खास महत्व है। 

ऐसे में जब बात जून में आने वाली 'ज्येष्ठ पूर्णिमा' की हो, तो इसका आध्यात्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है। ज्येष्ठ माह में आने वाली पूर्णिमा वट सावित्री पूर्णिमा कहलाती है, जो सुहागनों का एक अहम पर्व है। ऐसे में आज इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे जून महीने में कब मनाई जाएगी वट सावित्री पूर्णिमा- 

पावन अवसर है ज्येष्ठ पूर्णिमा

जून 2026 की यह पूर्णिमा कई मायनों में बेहद खास होने वाली है। यह सिर्फ एक आम पूर्णिमा नहीं है, बल्कि एक ऐसा दिन है, जब सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए वट सावित्री का पावन व्रत रखेंगी। इसी वजह से इसे वट पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। 

कई पुराणों में मिलता है वर्णन
माता सती के आत्मदाह करने का वर्णन कई पुराणों में मिलता है। स्कंद पुराण के काशी खंड में माता सती के आत्मदाह करने का वर्णन मिलता है। इसके अलावा श्रीमद्भागवत महापुराण के चतुर्थ स्कंध और शिव पुराण के रुद्र संहिता के सती खंड में भी माता सती की कथा देखने को मिलती है।

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पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त और सही तारीख

अगर आप भी इस दिन का व्रत रखते हैं या पूर्णिमा का पूरा फल पाना चाहते हैं, तो इस शुभ दिन की तारीख अभी नोट कर लें। इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा 29 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। 

हिन्दू पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा की शुभ तिथि 29 जून को सुबह 3:06 बजे शुरू हो जाएगी और अगले दिन यानी 30 जून की सुबह 5:26 बजे तक रहेगी। क्योंकि 29 जून को 'उदया तिथि' (सूर्योदय के समय की तिथि) मिल रही है, इसलिए पूर्णिमा और व्रत इसी दिन किए जाएंगे। शाम को 7:16 बजे चांद के दर्शन होंगे।

पूर्णिमा के लिए शुभ मुहूर्त

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:06 बजे से 04:46 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:57 बजे से 12:52 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 02:44 बजे से 03:40 बजे तक
  • गोधूलि: शाम 07:22 बजे से 07:42 बजे तक
  • अमृत काल: रात 08:53 बजे से 10:40 बजे तक

पूर्णिमा के दिन क्या करें खास

पूर्णिमा के दिन सुबह किसी पवित्र नदी में डुबकी लगाना बेहद शुभ माना जाता है। अगर नदी तक जाना मुमकिन न हो, तो आप नहाने के पानी में थोड़ा-सा गंगाजल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इसके बाद साफ कपड़े पहनें और अपने व्रत या पूजा का संकल्प लें। 

इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनना या पढ़ना बहुत ही फलदायी माना जाता है। दिन भर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का ध्यान करें। जब शाम को चांद निकल आए, तो उन्हें अर्घ्य (जल) जरूर दें, इससे मानसिक तनाव दूर होता है। इसके अलावा, अपनी सामर्थ्य के अनुसार गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न या वस्त्र का दान जरूर करें।

वट सावित्री पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए काफी अहम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस व्रत को करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही वैवाहिक जीवन भी खुशहाल होता है। इस व्रत को करने से दांपत्य जीवन में आ रही बाधाएं भी दूर होती हैं। 







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