मुहर्रम 2026: आज से शुरू हुआ इस्लामी नया साल 1448 हिजरी, जानिए कब है आशूरा और क्या है इसका महत्व

मुहर्रम 2026: आज से शुरू हुआ इस्लामी नया साल 1448 हिजरी, जानिए कब है आशूरा और क्या है इसका महत्व

इस्लाम धर्म में हिजरी कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम का होता है और मुस्लिम धर्म से जुड़े लोगों के लिए इसका महीने का खास महत्व है। दुनियाभर के मुसलमान मुहर्रम के महीने को नए साल के आगमन के तौर पर मनाते हैं। साल 2026 में मुहर्रम का खास महत्व है, क्योंकि यह इस्लामी वर्ष 1448 हिजरी की शुरुआत और आशूरा के पालन का प्रतीक है।

हिजरी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित है, जिस वजह से मुहर्रम की तारीख दुनिया भर में चांद दिखने के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। सऊदी अरब और कई खाड़ी के देशों ने मुहर्रम की शुरुआत की पुष्टि कर दी है, जबकि भारत में मुहर्रम की तिथि स्थानीय स्तर पर चांद दिखने पर निर्भर करती हैं।

साल 2026 में मुहर्रम कब?
सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कई खाड़ी देशों में मुहर्रम की आधिकारिक पुष्टि 16 जून 2026 को की जा चुकी है, जो इस्लामी नए साल 1448 हिजरी की शुरुआत का प्रतीक है।

हालांकि भारत में मुहर्रम की तिथि चांद दिखाई देने पर निर्भर करती है। आज यानी 17 जून से भारत में मुहर्रम की शुरुआत हो चुकी है।

ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है

साल 2026 में आशूरा कब है?
मुहर्रम का दसवें दिन मनाया जाने वाला आशूरा कई देशों में 25 जून को है, जबकि भारत में इसकी तारीख 26 जून, शुक्रवार को पड़ रही है।

इस्लाम में मुहर्रम का महत्व
इस्लाम धर्म के चार पवित्र महीनों में से एक महीना मुहर्रम का है। यह हिजरी कैलेंडर की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है, जो 622 ईस्वी में पैगंबर मुहम्मद के मक्का से मदीना प्रवास से शुरू होता है। माना जाता है कि, इस घटना ने पहले इस्लामी समुदाय की नींव रखी। भारत में कई मुसलमानों के लिए मुहर्रम का मौका प्रार्थना, चिंतन, दान और आध्यात्मिक विकास का समय होता है।

इस्लाम धर्म में आशूरा का महत्व
मुहर्रम के 10वें दिन को आशूरा के नाम से जाना जाता है। सुन्नी मुसलमानों में आशूरा पैगंबर मूसा और इस्राएलियों को उत्पीड़न से छुटकारा दिलाने जैसी घटनाओं की याद में मनाया जाता है। कई सुन्नी मुसलमान मुहर्रम की 9वीं और 10वीं तारीख को रोजा रखते हैं। शिया मुसलमानों के लिए आशूरा पैगंबर मुहम्मद के पोते इमाम हुसैन की 680 ईस्वी में कर्बला में हुई शहादत का प्रतीक है। यह दिन उनके लिए शोक, त्याग, उत्पीड़न के विरुद्ध प्रतिरोध का प्रतीक माना जाता है।







You can share this post!


Click the button below to join us / हमसे जुड़ने के लिए नीचें दिए लिंक को क्लीक करे


Related News



Comments

  • No Comments...

Leave Comments