एक्सेंचर (Accenture) के ताजा आउटलुक ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में ऐसी हलचल मचाई कि आईटी सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। बाजार खुलते ही निवेशकों के करीब ₹2 लाख करोड़ स्वाहा हो गए और टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो जैसे दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई। एक्सेंचर की कमजोर गाइडेंस ने यह डर बढ़ा दिया कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी खर्च में सुस्ती अभी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
एक्सेंचर की चेतावनी से क्यों घबराया बाजार?
वैश्विक आईटी और कंसल्टिंग कंपनी एक्सेंचर ने अपने वित्त वर्ष 2026 के राजस्व वृद्धि अनुमान को घटा दिया है। कंपनी ने कहा कि दुनिया भर की कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में दिलचस्पी तो दिखा रही हैं, लेकिन कुल टेक्नोलॉजी बजट नहीं बढ़ा रही हैं। यानी कंपनियां नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने की बजाय मौजूदा बजट को ही AI प्रोजेक्ट्स में शिफ्ट कर रही हैं। यही बात निवेशकों को सबसे ज्यादा परेशान कर गई।
IT शेयरों में मचा हाहाकार
एक्सेंचर की घोषणा के बाद भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट देखने को मिली। इंफोसिस के शेयर करीब 7.5% तक टूट गए। इसके अलावा, टीसीएस 6%, टेक महिंद्रा 6% से ज्यादा, एचसीएल टेक 3% और विप्रो 5% तक लुढ़क गए। कोफोर्ज, एमफैसिस, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, टाटा एलेक्सी और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज जैसे मिडकैप आईटी शेयरों में भी भारी बिकवाली हुई। निफ्टी 500 के टॉप लूजर्स में लगभग सभी आईटी कंपनियां शामिल रहीं।
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निवेशकों के डूबे ₹2 लाख करोड़
आईटी सेक्टर में आई इस बड़ी गिरावट का असर पूरे शेयर बाजार पर पड़ा। बाजार खुलते ही बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप करीब ₹2 लाख करोड़ घट गया। निवेशकों को डर है कि अगर एक्सेंचर जैसी वैश्विक कंपनी कमजोर मांग की बात कर रही है, तो भारतीय आईटी कंपनियों के लिए भी आने वाले क्वार्टर आसान नहीं होंगे।
भारतीय IT कंपनियों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
एक्सेंचर की रिपोर्ट में सबसे बड़ा झटका आउटसोर्सिंग बिजनेस से जुड़ा रहा। कंपनी की आउटसोर्सिंग बुकिंग्स सालाना आधार पर 15% घट गईं। भारतीय आईटी सेक्टर की कमाई का बड़ा हिस्सा आउटसोर्सिंग कॉन्ट्रैक्ट्स से आता है। ऐसे में यह संकेत बताता है कि विदेशी कंपनियां अभी बड़े टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने से बच रही हैं।
AI से उम्मीद बरकरार, लेकिन इंतजार लंबा
हालांकि एक्सेंचर ने यह भी कहा कि AI से जुड़े प्रोजेक्ट्स की मांग लगातार बढ़ रही है और कंपनी इस क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कर रही है। कंपनी इस साल करीब 9 अरब डॉलर के अधिग्रहण करने की प्लानिंग बना रही है। फिर भी निवेशकों की चिंता यह है कि AI का लाभ फिलहाल चर्चा में ज्यादा और कमाई में कम दिखाई दे रहा है। जब तक वैश्विक कंपनियां नए टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स पर खुलकर खर्च नहीं करतीं, तब तक भारतीय आईटी सेक्टर पर दबाव बना रह सकता है।
क्या आगे भी रहेगा दबाव?
ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, पश्चिम एशिया में तनाव और कमजोर कॉर्पोरेट खर्च आने वाले महीनों में आईटी सेक्टर के लिए चुनौती बने रह सकते हैं।

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