बांके बिहारी मंदिर का रहस्य: आरती में नहीं बजती घंटियां, कुछ सेकंड बाद बंद हो जाते हैं दर्शन

बांके बिहारी मंदिर का रहस्य: आरती में नहीं बजती घंटियां, कुछ सेकंड बाद बंद हो जाते हैं दर्शन

हमारे देश में हजारों की संख्या में मंदिर हैं और हर एक का अपना कोई रहस्य या कहानी है। न जाने कितने ऐसे मंदिर हैं जो किसी अनोखे रहस्य को खुद में समेटे हुए सदियों से हमारी संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। इन्हीं में से एक है वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण को समर्पित है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरा करने वाला माना जाता है।

भगवान कृष्ण के बाल अवतार की कई कथाएं प्रचलित हैं और उन्हें अत्यंत पूजनीय माना जाता है। श्री कृष्ण की बाल लीलाओं में चाहे उनका चंचल स्वभाव हो, गोवर्धन पर्वत उठाना हो, गोपियों के साथ रास रचाना हो या फिर माखन चुराना हो, इन सभी की अलग कहानी है। श्री कृष्ण के बाल काल की लीलाओं की वजह से ही वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर अत्यंत खास माना जाता है। श्री कृष्ण ने अपना शुरुआती जीवन वृंदावन में ही बिताया था। आइए आपको बताते हैं बांके बिहारी मंदिर के एक ऐसे रहस्य के बारे में जिसमें ये बताया जाता है कि आज भी इस मंदिर में आरती के समय नहीं बजाई जाती हैं घंटियां।

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बांके बिहारी मंदिर में घंटी बजाने की मनाही क्यों है?
बांके बिहारी मंदिर की इस अनोखी परंपरा के रूप में ऐसा कहा जाता है कि यहां श्री कृष्ण का बाल रूप विराजमान है और यदि कोई छोटा बच्चा सो रहा हो और उसके आस-पास घंटियां बजाई जाएं तो उसकी नींद खराब हो सकती है। इसी वजह से आरती के दौरान घंटियां बजाने से मना किया जाता है। यहां मौजूद भक्तों से लेकर पुजारियों तक सभी श्री कृष्ण के बाल रूप की पूजा करते हैं और उनके सम्मान में घंटियां नहीं बजाते हैं जिससे उनकी नींद में कोई बाधा न आए। वहां सभी कृष्ण को केवल भगवान के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे बच्चे के रूप में देखते हैं जिसे देखभाल और शांति की जरूरत होती है जिससे उनके आराम में बाधा न आए। यहां के पुजारी हमेशा मंदिर परिसर में ऐसा माहौल बनाते हैं जैसे किसी छोटे बच्चे को आराम दिया जा रहा हो।

बांके बिहारी मंदिर की एक अन्य अनोखी परंपरा
बांके बिहारी मंदिर की एक और अनोखी परंपरा यह है कि यहां कुछ सेकंड के बाद मूर्ति के सामने पर्दा डाला जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है क्योंकि अगर कोई व्यक्ति कुछ देर तक श्रीकृष्ण की मूर्ति की आंखों में एकटक देखता है, तो वह भक्त के वशीभूत होकर उसके साथ ही चले जाते हैं।

मंदिर में कुछ सेकंड के बाद ही पर्दा डालकर, पुजारी यह सुनिश्चित करते हैं कि भक्त कृष्ण की मौजूदगी से बहुत ज्यादा भावुक न हों और भगवान कृष्ण भी उनके साथ जाने के लिए सम्मोहित न हो जाएं।वास्तव में इस मंदिर से जुड़े ये रहस्य भक्तों को ओर आकर्षित करते हैं और मंदिर की भव्यता को और बढ़ाते हैं।







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