परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शिक्षकों के समर्पित प्रयासों का एक और प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। गरियाबंद जिले के प्राथमिक शाला देवपरसूली की छात्रा कुंजल सिंह, पिता नारायण सिंह, का चयन एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (EMRS) में हुआ है। इस उपलब्धि से पूरे गांव में हर्ष का माहौल है तथा विद्यालय परिवार के साथ ग्रामीणों ने भी इसे गर्व का क्षण बताया है।प्राथमिक शाला देवपरसूली से प्रत्येक वर्ष प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं विभिन्न प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर रहे हैं। इसी क्रम में इस वर्ष छात्रा कुंजल सिंह ने अपनी मेहनत, लगन और शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन के बल पर EMRS में चयन हासिल कर विद्यालय एवं गांव का नाम रोशन किया है।
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इस सफलता के पीछे विद्यालय के प्रधान पाठक गोपाल राम यादव एवं सहायक शिक्षक फत्ते लाल नेताम का विशेष मार्गदर्शन और निरंतर शैक्षणिक सहयोग रहा। दोनों शिक्षकों ने छात्रा को नियमित अध्ययन, अभ्यास और परीक्षा की तैयारी में लगातार प्रेरित किया, जिसका सकारात्मक परिणाम सामने आया।छात्रा के चयन की सूचना मिलते ही प्राथमिक शाला देवपरसूली में उत्साह का माहौल बन गया। विद्यालय में मिठाई बांटकर खुशी मनाई गई और छात्रा का सम्मान किया गया। ग्रामीणों ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कुंजल के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।इस अवसर पर दयालु राम, महेश राम, यशवंत कुमार, यादराम, बिशाली राम, लाल सिंह, जोगेश्वर, ललित राम, पुनिया बाई एवं दमेश्वरी सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासियों ने छात्रा और उसके परिवार को बधाई देते हुए कहा कि "कुंजल ने यह सिद्ध कर दिया है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर बड़ी सफलताएं हासिल कर सकते हैं। यह पूरे देवपरसूली गांव के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।"
प्रधान पाठक गोपाल राम यादव ने कहा कि "कुंजल शुरू से ही मेहनती, अनुशासित और लगनशील छात्रा रही है।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय में उसका चयन उसके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव है। हमें विश्वास है कि वह आगे भी इसी तरह सफलता प्राप्त करेगी। साथ ही हम चाहते हैं कि गांव के अन्य बच्चे भी उससे प्रेरणा लेकर शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएं।"कुंजल सिंह की इस सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यदि विद्यार्थियों में सीखने की लगन हो और शिक्षकों का समर्पित मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण अंचल के सरकारी विद्यालयों से भी राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। यह सफलता देवपरसूली ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

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