जगदलपुर : बस्तर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में वेतन आहरण से जुड़े एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। नियमित ऑडिट के दौरान सामने आई अनियमितताओं ने विभाग में हड़कंप मचा दिया है। प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
ऑडिट में खुली हेराफेरी की परतें
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, एसपी कार्यालय की विभिन्न शाखाओं का समय-समय पर इंटरनल और एक्सटर्नल ऑडिट कराया जाता है। इसी ऑडिट के दौरान वेतन शाखा में गड़बड़ियों की जानकारी मिली। इसके बाद डीएसपी मुख्यालय की ओर से प्राथमिक जांच कराई गई, जिसमें वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
सॉफ्ट कॉपी में एडिट कर बढ़ाया जाता था वेतन
जांच में सामने आया कि वेतन शाखा में पदस्थ सहायक गिरीश राय वेतन आहरण से पहले सॉफ्ट कॉपी में बदलाव कर अपने और अपने साथियों के वेतन में अवैध रूप से बढ़ोतरी कर देता था। पूछताछ के दौरान आरोपी ने इस पूरे खेल को स्वीकार भी कर लिया। इसके बाद पुलिस ने कार्यालय के ही कर्मचारी राजकुमार कत्लम और हेमंत मैथ्यू की भूमिका भी संदिग्ध पाई।
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तीनों आरोपी गिरफ्तार, करोड़ों की निकासी का आरोप
तीनों आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस का अनुमान है कि पिछले लगभग दो वर्षों में अलग-अलग खातों के माध्यम से करीब 1.5 से 2 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की गई है। फिलहाल बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच जारी है।
‘लोन’ के नाम पर भी रचा गया खेल
विवेचना के दौरान एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। पुलिस के अनुसार कुछ कर्मचारियों के खातों में लोन देने के नाम पर अतिरिक्त वेतन राशि डाली गई और बाद में वह रकम नकद वापस ले ली गई। ऐसे सभी लोगों की सूची तैयार कर उनसे पूछताछ की जा रही है, ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सके।
जांच जारी, बढ़ सकती है कार्रवाई
SP शलभ सिन्हा का कहना है कि यह जांच अभी शुरुआती चरण में है और जैसे-जैसे नए तथ्य सामने आएंगे, वैसे-वैसे कार्रवाई का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि इस करोड़ों के वेतन घोटाले में कहीं और लोग तो शामिल नहीं हैं। फिलहाल इस खुलासे ने पुलिस विभाग की वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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