माता सती की एक भूल, भगवान शिव का कठोर श्राप और कोयल बनने का रहस्य... जानिए कोकिला व्रत की अद्भुत पौराणिक कथा

माता सती की एक भूल, भगवान शिव का कठोर श्राप और कोयल बनने का रहस्य... जानिए कोकिला व्रत की अद्भुत पौराणिक कथा

क्या आपने कोकिला व्रत के बारे में सुना है, जो माता पार्वती के कोकिला रूप को समर्पित है। ये व्रत 28 जुलाई 2026 को रखा जाएगा। मान्यता है इस व्रत को रखने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं ये व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए भी वरदान माना जाता है। कोकिला व्रत माता सती के उस कठिन तप की याद दिलाता है जब देवी सती हजारों वर्षों तक कोयल बनकर रही थीं। इसी कारण से इस व्रत में मिट्टी से बनाई गई कोयल की मूर्ति की पूजा जरूरी की जाती है। कहते हैं माता सती को कोकिला यानी कोयल का रूप भगवान शिव द्वारा दिए गए श्राप के कारण मिला था। जानिए किस भूल के कारण भगवान शिव ने अपनी अर्धांगिनी को ये भयंकर श्राप दिया था। क्या है माता सती के कोकिला रूप का रहस्य?

माता सती की एक भूल

माता सती के कोयल बनने की कथा उस समय से जुड़ी है जब देवी सती के पिता दक्ष ने अपने यहां यज्ञ का आयोजन किया था। इस यज्ञ में उन्होंने समस्त देवी देवताओं को आमंत्रित किया, लेकिन भगवान शिव और अपनी बेटी सती को नहीं बुलाया। जब देवी सती को इस बात का पता चला तो वो महादेव से यज्ञ में शामिल होने की जिद्द करने लगीं। भगवान शिव ने सती को बहुत समझाया कि बिना बुलाए इस यज्ञ में जाना ठीक नहीं, लेकिन माता सती नहीं मानीं और वो यज्ञ में शामिल होने के लिए चली गईं।

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मिला कोयल बनने का श्राप

माता सती जैसे ही अपने पिता दक्ष के यज्ञ में पहुंची तो उनके पिता ने उनका और उनके पति यानी भगवान शिव का अनादर किया। अपने पति का अपमान माता सती सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने क्रोध में यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए। जब भगवान शिव को इस बात का पता चला तो उन्होंने दक्ष को तो दंडित किया ही, साथ ही देवी सती को भी उनकी आज्ञा का पालन न करने के लिए हजारों वर्षों तक कोयल बनकर रहने का श्राप दे दिया। कहते हैं इसी श्राप के कारण देवी सती कई हजारों साल तक नंदन वन में कोयल बनकर घूमती रहीं। फिर जाकर उन्होंने देवी पार्वती के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को प्राप्त किया। 







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