कभी बुजुर्गों को होने वाली या 50-60 साल के बाद होने वाली क्रॉनिक किडनी डिजीज अब युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही है। डॉक्टर्स की मानें तो ऐसे काफी केस आ रहे हैं जिनमें कम उम्र में रोगियों के गुर्दे से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही हैं। 20, 30 और 40 साल की उम्र के लोगों में आधुनिक जीवनशैली की आदतों, मेटाबॉलिक संबंधी विकारों और जांच में देरी के कारण किडनी की कार्यक्षमता कम हो रही है। क्रॉनिक किडनी रोग की खतरनाक बात ये है कि शरीर में अक्सर ये चुपके से विकसित हो रही होती है। जब इसका पता चलता है तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
क्रॉनिक किडनी डिजीज के कारण
इसके कई कारण हो सकते हैं। जो धीरे-धीरे गंभीर स्थिति की ओर ले जाते हैं। कम उम्र के युवाओं में गुर्दे की बीमारी अधिक क्यों हो रही है। इसके पीछे कुछ अहम कारण हैं।
डायबिटीज- भारत में तेजी से डायबिटीज के मरीज बढ़ रहे हैं जिससे ब्लड शुगर अनियंत्रित हो जाता है। इससे किडनी के अंदर की छोटी रक्त वाहिकाओं को धीरे-धीरे नुकसान होता है और किडनी ठीक से फिल्टर नहीं कर पाती। कम उम्र के लोगों में क्रोनिक किडनी रोग (सीसीडी) का ये एक बड़ा कारण है।
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हाई ब्लड प्रेशर- युवाओं में बढ़ा हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी रोग को बढ़ाता है। इससे किडनी की रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है और समय के साथ अनियंत्रित रक्तचाप गुर्दे के ऊतकों को नुकसान पहुंचा सकता है और गुर्दे की कार्यक्षमता को कम कर सकता है।
पानी की कमी- अगर आप कम मात्रा में पानी पीते हैं तो इससे किडनी पर असर पड़ता है। दिनभर में कम मात्रा में तरल पदार्थ का सेवन करने से गुर्दों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है, खासकर गर्मी के दिनों में या जो लोग बहुत ज्यादा पसीना बहाते हैं। कैफीन की ज्यादा मात्रा भी इसके लिए ठीक नहीं है।
किडनी रोग के अन्य कारण
क्रॉनिक किडनी डिजीज के लक्षण

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