जगदलपुर :अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा मामले के बाद छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर के चढ़ावे को लेकर सवाल उठ रहे हैं. मंदिर के चढ़ावे और सोने-चांदी के आभूषण से जुड़े रिकॉर्ड सवालों के घेरे में है. मंदिर के मुख्य पुजारी का दावा है कि वर्षों से चढ़ावे और आभूषणों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया गया, जबकि इस संबंध में की गई शिकायत की जांच आठ साल बाद भी पूरी नहीं हो सकी. अब मांग उठ रही है कि मंदिर के खजाने का पारदर्शी सत्यापन कराया जाए और श्रद्धालुओं के चढ़ावे का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाए.
दरअसल, बस्तर की रियासतकालीन परंपरा से जुड़े मां दंतेश्वरी मंदिर समेत 22 मंदिरों का संचालन टेंपल कमिटी के माध्यम से किया जाता है. इन आस्था के केंद्रों में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु नकद राशि, सोने-चांदी के आभूषण और छत्र सहित विभिन्न प्रकार के चढ़ावे अर्पित करते हैं.
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खजाने के सत्यापन का निर्देश, फिर भी पालन नहीं
मां दंतेश्वरी मंदिर के मुख्य पुजारी कृष्ण कुमार का कहना है कि वर्षों से जमा हो रहे इन आभूषणों का विस्तृत रिकॉर्ड सामने नहीं लाया गया. उनका आरोप है कि रिकॉर्ड केवल वजन तक सीमित है, जबकि आभूषणों की गुणवत्ता, शुद्धता और वास्तविक स्थिति का नियमित सत्यापन नहीं किया जाता. पुजारी का यह भी कहना है कि वर्ष 2020 में खजाने के सत्यापन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन उनका पालन नहीं हुआ.
मां दंतेश्वरी मंदिर न केवल बस्तर की आस्था का केंद्र है, बल्कि टेंपल कमिटी की गतिविधियों का प्रमुख आधार भी माना जाता है. मंदिरों के रखरखाव और धार्मिक आयोजनों में हर साल बड़ी राशि खर्च होती है. ऐसे में श्रद्धालुओं और मंदिर से जुड़े जानकारों का मानना है कि चढ़ावे, आभूषणों और मंदिर के खजाने का नियमित ऑडिट और सार्वजनिक रिकॉर्ड व्यवस्था लागू होनी चाहिए. उनका कहना है कि इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि वर्षों से लंबित शिकायतों पर भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा.

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