एक साल से अधूरा पड़ा प्राथमिक शाला भवन, छप्पर के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल

एक साल से अधूरा पड़ा प्राथमिक शाला भवन, छप्पर के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल

बेगरपाला के पंडरीपानी में शिक्षा व्यवस्था बदहाल, बारिश के मौसम में बच्चों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

 

परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद : जिले के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र स्थित ग्राम पंचायत बेगरपाला के आश्रित ग्राम पंडरीपानी में शिक्षा व्यवस्था गंभीर अव्यवस्था का शिकार बनी हुई है। यहां प्राथमिक शाला भवन के निर्माण के नाम पर लगभग एक वर्ष पहले पुराने भवन की छत तोड़ दी गई, लेकिन इसके बाद से निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा हुआ है। नतीजतन विद्यालय के छोटे-छोटे बच्चे आज भी एक अस्थायी छप्पर के नीचे पढ़ाई करने को विवश हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय भवन की छत हटाने के बाद निर्माण एजेंसी ने काम शुरू ही नहीं किया। एक वर्ष बीत जाने के बावजूद न तो नया भवन बन पाया और न ही बच्चों के लिए कोई सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था की गई। मजबूरी में शिक्षक खुले वातावरण में बने अस्थायी छप्पर के नीचे कक्षाएं संचालित कर रहे हैं, जहां बच्चों को हर दिन कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।

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बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। तेज बारिश और हवा चलने पर पढ़ाई बाधित हो जाती है, वहीं छप्पर के नीचे बैठने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में लगातार चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों को इस तरह जोखिम भरे माहौल में पढ़ाना न केवल उनकी शिक्षा बल्कि उनके जीवन की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय है।ग्रामीणों ने बताया कि इस समस्या की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों और शिक्षा विभाग को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू कराने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। इससे लोगों में प्रशासन और निर्माण एजेंसी के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

स्थानीय ग्रामीणों और पालकों ने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग तथा संबंधित निर्माण एजेंसी से मांग की है कि प्राथमिक शाला भवन का निर्माण कार्य तत्काल प्रारंभ कराया जाए। साथ ही जब तक नया भवन तैयार नहीं हो जाता, तब तक बच्चों के लिए सुरक्षित एवं पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो और वे सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सकें।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन पंडरीपानी की यह तस्वीर उन दावों की वास्तविकता सामने ला रही है। अब लोगों की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि आखिर कब इस अधूरे निर्माण कार्य को पूरा कर बच्चों को सुरक्षित विद्यालय भवन उपलब्ध कराया जाएगा।







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