भारत में मंदिरों को न सिर्फ धार्मिक स्थान का दर्जा दिया गया है बल्कि इन्हें आध्यात्मिकता का केंद्र भी माना जाता है। यहां के हर मंदिर का एक अलग इतिहास है और सबकी एक अलग कहानी जो इन्हें और ज्यादा खास बनाती है।जहां कुछ मंदिरों के लिए यह प्रचलित है कि किसी निश्चित समय के बाद वहां प्रवेश नहीं किया जा सकता है, वहीं कुछ मंदिरों के अलग रीति-रिवाज हैं जो इन्हें दूसरों से अलग बनाते हैं।भारत के कुछ ऐसे मंदिर हैं जहां का प्रसाद बहुत पवित्र माना जाता है, वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिनका प्रसाद घर लाने से मना किया जाता है।
जब भी हम किसी मंदिर या तीर्थस्थल में जाते हैं तो वहां का प्रसाद हमेशा सभी को बांटकर ग्रहण किया जाता है, लेकिन इन मंदिरों में ऐसा क्या है जहां से आप प्रसाद घर नहीं ला सकते हैं? आइए जानें यहां की अनोखी परंपरा के बारे में।
मेहंदीपुर बालाजी मंदिर, राजस्थान
मेहंदीपुर बालाजी भारत के सबसे रहस्यमयी मंदिरों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में रोज लाखों भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर की मान्यता है कि यदि किसी व्यक्ति पर नकारात्मक ऊर्जा का वास होता है तो वह इस मंदिर में जरूर जाता है और बाला जी के आशीर्वाद से उनकी सभी बालाएं टल जाती हैं।
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यह मंदिर हनुमान जी के बाला जी रूप को दिखाता है। ऐसा कहा जाता है कि यहां का प्रसाद कभी आपको घर नहीं लाना चाहिए, नहीं तो प्रसाद के साथ कोई न कोई नकारात्मक ऊर्जा भी घर आ सकती है। अगर आप वहां प्रसाद ले रहे हैं तो उसे मंदिर परिसर में ही ग्रहण करें।
कामाख्या मंदिर, असम
कामाख्या मंदिर गुवाहाटी के पास नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है। यह भारत के सबसे महत्वपूर्ण शक्तिपीठों में से एक है। इस मंदिर को तंत्र पूजा के लिए प्रसिद्द माना जाता है और यहां माता की योनि की पूजा की जाती है।
ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में मिलने वाले प्रसाद को मंदिर परिसर में ही ग्रहण कर लेना चाहिए और इसे भूलकर भी ग्रहण नहीं करना चाहिए। ये प्रसाद बहुत पवित्र माना जाता है और इनमें खास ऊर्जा होती है, इसलिए इस प्रसाद को मंदिर परिसर में ही ग्रहण करने की सलाह दी जाती है।
कोटिलिंगेश्वर मंदिर, कर्नाटक
कोटिलिंगेश्वर मंदिर लाखों शिव लिंगों के लिए प्रसिद्द है। यह भारत के सबसे अनोखे धार्मिक स्थलों में से एक है, जो यात्रियों को अपनी ओर खींचता है।
जब यहां के प्रसाद की बात होती है तो ऐस कहा जाता है कि यहां चढ़ाई गई चीजें प्रतीकात्मक रूप से भगवान शिव के भक्त चंदेश्वर की मानी जाती हैं। इसी वजह से, कई भक्तों का मानना है कि प्रसाद को साथ घर नहीं ले जाना चाहिए यही नहीं इस प्रसाद को खुद भी नहीं ग्रहण करना चाहिए।
काल भैरव मंदिर, मध्य प्रदेश
उज्जैन के इंदौर शहर में स्थित काल भैरव मंदिर देश के सबसे दिलचस्प धार्मिक स्थलों में से एक है। यहां भक्त प्रतिमा पर मदिरा चढ़ाते हैं और ऐसा माना जाता है कि काल भैरव को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को आम तौर पर मंदिर के पारंपरिक प्रसाद की तरह नहीं ग्रहण करना चाहिए। इसी वजह से इस मंदिर के प्रसाद को घर लाने से मना किया जाता है।
नैना देवी मंदिर, हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर स्थित नैना देवी मंदिर का प्रसाद भी घर लाने से मना किया जाता है। शिवालिक पर्वतमाला में स्थित यह मंदिर भारत के शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यह मंदिर के कई स्थानीय रीति-रिवाजों में से एक यह भी है यहां अर्पित की गई चीजों को कभी भी घर नहीं लाना चाहिए।

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