वन विभाग की उदासीनता से उजड़ रहे जंगल! रसेला में ग्रामीणों ने किया अतिक्रमण का निरीक्षण, वृक्षारोपण क्षेत्र में खेत मिलने पर जताई चिंता

वन विभाग की उदासीनता से उजड़ रहे जंगल! रसेला में ग्रामीणों ने किया अतिक्रमण का निरीक्षण, वृक्षारोपण क्षेत्र में खेत मिलने पर जताई चिंता

परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद : पर्यावरण संरक्षण और वनों की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन द्वारा हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर विभिन्न अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर विभागीय उदासीनता के कारण वन और वनभूमि , चारागाह लगातार अतिक्रमण तथा अवैध कटाई की चपेट में आते जा रहे हैं। गरियाबंद जिले के ग्राम रसेला में ऐसी ही स्थिति सामने आई है, जहां ग्रामीणों ने वन, वनभूमि, चारागाह एवं धरसा भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण और अवैध कटाई को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।रविवार को ग्राम समिति, जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों एवं चारवाहों ने संयुक्त रूप से वन क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर पूर्व में वन विभाग द्वारा किए गए सागौन एवं बांस के वृक्षारोपण क्षेत्र में अवैध कब्जा कर खेती किए जाने के मामले सामने आए। ग्रामीणों का कहना है कि जिन स्थानों पर कभी घने पौधे लगाए गए थे, वहां अब केवल पेड़ों के ठूंठ दिखाई दे रहे हैं और बड़े पैमाने पर भूमि को समतल कर खेत बना दिया गया है।

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ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी क्षेत्र का नियमित निरीक्षण नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण अतिक्रमण और अवैध कटाई करने वालों के हौसले बुलंद हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दो से तीन वर्षों में क्षेत्र की वनभूमि पूरी तरह उजड़कर मैदान में तब्दील हो सकती है, जिसका सीधा असर पर्यावरण संतुलन, जैव विविधता और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर पड़ेगा।ग्रामीणों ने जानकारी देते हुए यह भी कहा कि वनभूमि के पट्टे संबंधी घोषणाओं के बाद कुछ लोगों द्वारा इसका गलत लाभ उठाते हुए वनभूमि और चारागाह पर अवैध कब्जा किया जा रहा है। इसके चलते पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर खेती के लिए भूमि तैयार की जा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के सभी प्रयास प्रभावित हो रहे हैं।

निरीक्षण में मौजूद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वनभूमि, चारागाह एवं धरसा भूमि पर हुए अतिक्रमण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही नियमित निगरानी बढ़ाकर वन संपदा की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सके।निरीक्षण के दौरान उपसरपंच परमेश्वर यादव, ग्राम समिति अध्यक्ष बिग्रेंद्र ठाकुर, धनीराम यादव, नंदूदास मानिकपुरी, नंदकिशोर यादव, वेदव्यास निषाद, रामायण ठाकुर, राघवेंद्र यादव, लोकराम ध्रुव, धनेश्वर ठाकुर, बिसाहूराम ठाकुर, योगराम नागेश, धनेश्वर दास, लक्ष्मण यादव, जीवराखन यादव, देवलाल साहनी, कमलदास, परमेश्वर पटेल, केशर नागेश, बद्धूराम ठाकुर, संतराम यादव, मोती मरकाम, लोकराम, खेमचंद तांडी, लखन ठाकुर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।







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