परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद : विकास कार्यों की मॉनिटरिंग और रखरखाव के अभाव में करोड़ों नहीं, बल्कि लाखों रुपये की सरकारी योजनाएं भी किस तरह दम तोड़ देती हैं, इसका उदाहरण गरियाबंद जिले के ग्राम तेंदुबाय में देखने को मिल रहा है। यहां आकुरजोनी देव स्थल के पास पैरी नदी पर छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा लगभग 54.49 लाख रुपये की लागत से स्थापित सौर सामुदायिक सिंचाई योजना आज पूरी तरह बदहाल और कबाड़ में तब्दील होती नजर आ रही है।योजना के सूचना बोर्ड के अनुसार इससे 20.85 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन वर्तमान में न तो योजना चालू है और न ही इससे किसानों को सिंचाई का कोई लाभ मिल रहा है। रखरखाव के अभाव में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो चुकी है, कई पाइप टूट गए हैं और कुछ पाइप चोरी भी हो चुके हैं। सौर उपकरण और अन्य संसाधन भी अनुपयोगी स्थिति में पड़े हुए हैं।
ग्रामीणों के अनुसार योजना का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे शुरू तो किया गया था, लेकिन पाइपलाइन में दो स्थानों पर जमीन के नीचे वाल्व लगाए गए थे। निचले हिस्से के किसान वाल्व खोलकर पानी का उपयोग कर लेते थे, जिससे ऊपरी क्षेत्र तक पानी पहुंच ही नहीं पाता था। इस कारण अधिकांश किसानों को योजना का लाभ नहीं मिला और धीरे-धीरे लोगों की रुचि भी खत्म हो गई। विभाग द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और रखरखाव नहीं किए जाने के कारण पूरी योजना बंद हो गई और आज कबाड़ का रूप ले चुकी है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि योजना का सही संचालन और नियमित रखरखाव किया जाता तो क्षेत्र के अनेक किसानों की कृषि भूमि सिंचित होती। जिस स्थान पर यह योजना बनाई गई है, वहां पैरी नदी में वर्षभर पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहता है। ऐसे में यह योजना किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती थी।
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प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन की अपार संभावनाएं
जिस स्थान पर यह सौर सिंचाई योजना स्थापित की गई है, वह आकुरजोनी देव स्थल के समीप पैरी नदी के तट पर स्थित है। यहां नदी, पहाड़ और विशाल चट्टानों का मनमोहक दृश्य पर्यटकों को सहज ही आकर्षित कर सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि सरकार इस क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे तो आसपास के ग्रामीणों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यह स्थान प्रसिद्ध पैरी घुमर पर्यटन स्थल से लगभग 25 से 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां प्रतिवर्ष हजारों पर्यटक पहुंचते हैं। यदि इस क्षेत्र को पर्यटन सर्किट से जोड़ा जाए तो इसका सीधा लाभ स्थानीय ग्रामीणों और विशेष रूप से आदिवासी समुदाय को मिल सकता है।
भुंजिया जनजाति की संस्कृति भी आकर्षण का केंद्र
ग्राम तेंदुबाय में विशेष पिछड़ी जनजाति भुंजिया समाज के लोग निवास करते हैं। उनकी पारंपरिक कच्ची घास-फूस की झोपड़ियां, रहन-सहन, संस्कृति और रीति-रिवाज आज भी अपनी मौलिक पहचान बनाए हुए हैं। यदि पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए तो यह जनजातीय संस्कृति भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है, जिससे स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत होगी।
जांच और पुनर्जीवन की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि करोड़ों नहीं बल्कि लगभग 55 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस सौर सामुदायिक सिंचाई योजना की तकनीकी जांच कराई जाए, दोषियों की जवाबदेही तय की जाए तथा योजना को पुनः चालू कर किसानों को सिंचाई का लाभ दिलाया जाए। साथ ही, क्षेत्र की प्राकृतिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को देखते हुए इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की दिशा में भी ठोस पहल की जाए।

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