गौरी व्रत मुख्य रूप से गुजरात में लोकप्रिय है। यह व्रत अविवाहित लड़कियों द्वारा अच्छे पति की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस व्रत की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है और समापन गुरु पूर्णिमा के दिन होता है। इस व्रत में माता गौरी की पूजा होती है। पांच दिनों तक रखे जाना वाला यह व्रत माता पार्वती और भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है। कई जगह इस व्रत को सुहागिन महिलाएं भी रखती हैं। इस साल यह उपवास 25 जुलाई से 29 जुलाई तक रखा जाएगा। यहां आप जानेंगे गौरी व्रत की पूजा का मुहूर्त, विधि और महत्व।
गौरी व्रत 2026 पूजा मुहूर्त
ये भी पढ़े :मुखिया के मुखारी - पैसा सबसे ज्यादा जरुरी है
गौरी व्रत की पूजा विधि
गौरी व्रत का महत्व
मान्यताओं अनुसार गौरी व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को अच्छे वर की प्राप्ति होती है, तो वहीं सुहागिन महिलाएं ये व्रत अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं। कहते हैं इस व्रत को रखने से वैवाहिक जीवन में प्रेम और सौहार्द बना रहता है। साथ ही घर में सुख-शांति आती है।
माता गौरी को प्रसन्न करने के उपाय

Comments