‘कोई भी लक्ष्य हमारी पहुंच से बाहर नहीं…’ ऑपरेशन सिंदूर पर वायुसेना प्रमुख का पाकिस्तान को सख्त संदेश

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भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर से मिली सैन्य सीख और भविष्य की तैयारियों को लेकर अहम बातें साझा की हैं। पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर लगभग 1,200 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में और 200 किलोमीटर तक अंदर किए गए सटीक हमलों ने भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता को प्रदर्शित किया। उनके बयान को पाकिस्तान के संदर्भ में एक कड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

वायुसेना प्रमुख के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने यह दिखाया कि आधुनिक सैन्य अभियानों में केवल अलग-अलग विमानों या हथियारों पर निर्भर रहने के बजाय सभी संसाधनों को एकीकृत कर क्षमता के आधार पर रणनीति बनाना कितना महत्वपूर्ण है।

‘क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत’

एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह ने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता का मतलब यह नहीं है कि वायुसेना अपनी तैयारियों को यहीं तक सीमित रखे। उन्होंने कहा कि बदलती परिस्थितियों और संभावित चुनौतियों के अनुरूप सैन्य क्षमताओं को लगातार मजबूत और विस्तारित करना जरूरी है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि किसी भी सैन्य अभियान में एक से अधिक विकल्प तैयार रखना महत्वपूर्ण है। यदि विरोधी पक्ष अपनी रणनीति में बदलाव करता है, तो उसके अनुरूप तेजी से ढलने की क्षमता भी होनी चाहिए।

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रणनीति में लचीलापन बना अहम पहलू

वायुसेना प्रमुख के अनुसार, क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण का लाभ यह है कि कार्रवाई के लिए किसी एक हथियार या साधन पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। अलग-अलग संसाधनों और प्रणालियों का परिस्थितियों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इसी लचीलेपन ने जरूरत के मुताबिक जवाबी कार्रवाई तय करने में मदद की। उनके मुताबिक, इस अभियान ने संकट के समय तेजी से कार्रवाई करने और विरोधी की सैन्य योजनाओं को बाधित करने में वायु शक्ति की भूमिका को रेखांकित किया।

स्वदेशी हथियार प्रणालियों के प्रदर्शन का भी जिक्र

ए.पी. सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान स्वदेश में विकसित कुछ हथियार प्रणालियों ने प्रभावी प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई की सफलता किसी एक हथियार या विमान की वजह से नहीं, बल्कि कई क्षमताओं के समन्वित इस्तेमाल से संभव हुई।

उनके मुताबिक, सटीक खुफिया जानकारी, नेटवर्क आधारित अभियान, दूर से लक्ष्य पर हमला करने वाले हथियार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, बहुस्तरीय वायु रक्षा और मानवरहित हवाई प्रणालियों से निपटने की क्षमताओं ने मिलकर अभियान में योगदान दिया।

गति, सटीकता और आपसी तालमेल पर जोर

वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर से मिली एक प्रमुख सीख के रूप में गति, सटीकता, एकीकरण और परिस्थितियों के अनुसार बदलने की क्षमता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विमानों, सेंसर, हथियारों और नेटवर्क को एक साझा प्रणाली के रूप में इस्तेमाल करने से सैन्य अभियानों की प्रभावशीलता बढ़ती है।

उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में भी भारतीय वायुसेना इसी दृष्टिकोण के साथ अपनी तैयारियों को आगे बढ़ाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर तेजी से और अधिक सटीक कार्रवाई की जा सके।

ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के आधार पर वायुसेना की भावी तैयारी, स्वदेशी तकनीक और विभिन्न सैन्य प्रणालियों के बीच समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।

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