न ट्यूशन, न कोचिंग… बच्चों का रिजल्ट सुधारने बालोद के 11 गांवों ने अपनाया अनोखा तरीका

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बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्कूली बच्चों की पढ़ाई और परीक्षा परिणाम बेहतर बनाने के लिए ग्रामीणों और पालकों ने मिलकर एक अनोखी पहल शुरू की है। डौंडी विकासखंड के संकुल केंद्र सुरडोंगर के अंतर्गत आने वाले 11 गांवों में तय किया गया है कि बच्चे शाम 6 बजे के बाद बिना किसी जरूरी काम के घर से बाहर नहीं निकलेंगे। इस समय का उपयोग वे पढ़ाई के लिए करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ाना, परीक्षा परिणाम में सुधार लाना और उन्हें नशे तथा गलत संगत से दूर रखना है। पालकों के मुताबिक, शुरुआती बदलाव तिमाही परीक्षा के परिणामों में दिखाई दिए हैं। हालांकि, इस पहल के दीर्घकालीन प्रभाव का आकलन आने वाली परीक्षाओं के नतीजों से हो सकेगा।

गांव-गांव में मुनादी कर लिया गया फैसला

बच्चों के परीक्षा परिणाम में सुधार और उनकी दिनचर्या को व्यवस्थित करने के लिए ग्रामीणों तथा पालकों ने सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया। गांवों में मुनादी कराकर लोगों को इसकी जानकारी दी गई।

तय व्यवस्था के अनुसार, बच्चे स्कूल से लौटने के बाद शाम 6 बजे तक बाहर रह सकते हैं। इसके बाद उन्हें घर में रहकर पढ़ाई करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि इससे बच्चों को नियमित अध्ययन के लिए पर्याप्त समय मिलेगा और वे परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकेंगे।

बच्चों को मिल रहा पढ़ाई के लिए अतिरिक्त समय

इस पहल के बाद बच्चों की दिनचर्या में बदलाव आने की बात सामने आई है। बच्चों के मुताबिक, पहले स्कूल से लौटने के बाद वे शाम को गांव में घूमने में समय बिताते थे। अब शाम 6 बजे के बाद घर पर रहकर पढ़ाई करने पर ध्यान दे रहे हैं।

पालकों का कहना है कि इसका सकारात्मक असर तिमाही परीक्षा के परिणामों में देखने को मिला है। उन्हें उम्मीद है कि नियमित पढ़ाई और घर में मिलने वाले सहयोग से आगामी परीक्षाओं में भी बच्चों का प्रदर्शन बेहतर होगा।

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100 पेज की कॉपी से रखी जा रही पढ़ाई पर नजर

बच्चे रोजाना पढ़ाई कर रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी के लिए भी एक व्यवस्था बनाई गई है। प्रत्येक बच्चे को 100 पेज की कॉपी में प्रतिदिन पढ़े गए विषयों और पढ़ाई का विवरण लिखने के लिए कहा गया है।

इसके बाद पालक कॉपी में दर्ज जानकारी की जांच कर हस्ताक्षर करते हैं और उसे स्कूल भेजा जाता है। विद्यालय में शिक्षक कॉपी में लिखे विषयों से जुड़े सवाल पूछकर बच्चों की तैयारी का आकलन करते हैं। इस तरह घर और स्कूल, दोनों स्तरों पर बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दिया जा रहा है।

नशे और गलत संगत से दूर रखने की भी कोशिश

सुरडोंगर हायर सेकंडरी स्कूल की पालक समिति के अध्यक्ष भुवेंद्र साहू के मुताबिक, बच्चों के परीक्षा परिणाम और नशे के आदी लोगों की संगत को लेकर चिंता के बाद ग्रामीणों ने यह पहल शुरू की।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष बालोद जिला परीक्षा परिणाम के टॉप-10 में जगह नहीं बना पाया था। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने और उनकी दिनचर्या में अनुशासन लाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया।

ग्रामीणों को उम्मीद है कि बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय देने और उनकी गतिविधियों पर ध्यान रखने से उनमें आत्मविश्वास बढ़ेगा। साथ ही वे नशे और असामाजिक गतिविधियों से दूर रहकर अपने भविष्य पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

इन 11 गांवों में शुरू हुई पहल

संकुल केंद्र सुरडोंगर के अंतर्गत आने वाले जिन 11 गांवों में यह पहल शुरू की गई है, उनके नाम हैं:

  1. सुरडोंगर
  2. कुंजकन्हार
  3. मरकाटोला
  4. कुर्सीटिकुर
  5. मरदेल
  6. मगरदाह
  7. तुमडीसुर
  8. जबकसा
  9. लिमऊडीह
  10. नयापारा
  11. खल्लारीपारा

ग्रामीणों की इस पहल में बच्चों की पढ़ाई को लेकर परिवार और विद्यालय के बीच समन्वय पर जोर दिया गया है। अब आने वाली परीक्षाओं में परिणाम किस हद तक बेहतर होते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

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