कवर्धा टेकेश्वर दुबे : राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत महिला स्व-सहायता समूहों की लखपति दीदियों द्वारा तैयार किए जा रहे आकर्षक, गुणवत्तापूर्ण एवं जैविक उत्पादों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरदार पटेल मैदान कवर्धा में तीन दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। दीपावली पर्व के अवसर पर 4 से 6 नवंबर तक आयोजित इस प्रदर्शनी का अवलोकन कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने किया।

प्रदर्शनी में महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा तैयार किए गए आकर्षक एवं उपयोगी उत्पादों के विभिन्न स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें आकर्षक मूर्तियां, रंग-बिरंगी मालाएं, दीपक, बिरनमाला, अगरबत्ती, दैनिक उपयोग की हैंडलूम सामग्री सहित बिजौरी, अमचूर, अचार, पापड़ एवं अन्य स्थानीय खाद्य उत्पाद शामिल हैं। कलेक्टर ने प्रत्येक स्टॉल का अवलोकन करते हुए महिला समूहों की दीदियों से उनके उत्पादों की निर्माण प्रक्रिया, गुणवत्ता, लागत एवं विपणन से संबंधित जानकारी ली। उन्होंने महिलाओं के हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
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दीपावली के आकर्षक पैक देखकर की सराहना, उत्पादों की खरीदारी कर बढ़ाया उत्साह
दीपावली पर्व को ध्यान में रखते हुए महिला समूहों द्वारा विशेष रूप से तैयार किए गए चिरौंजी एवं अन्य ड्राई फ्रूट्स के आकर्षक पैक ने कलेक्टर एवं सीईओ का ध्यान आकर्षित किया। दोनों अधिकारियों ने उत्पादों की गुणवत्ता एवं आकर्षक पैकेजिंग की सराहना करते हुए विभिन्न सामग्रियों की खरीदारी भी की। उनके इस प्रोत्साहन से महिला समूहों की दीदियों में विशेष उत्साह देखने को मिला।
महिला समूहों के उत्पादों को अपनाएं, ग्रामीण महिलाओं को बनाएं आत्मनिर्भर
कलेक्टर तुलिका प्रजापति एवं जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल ने जिले के नागरिकों से अपील की कि वे दीपावली पर्व के अवसर पर महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए स्थानीय, आकर्षक एवं जैविक उत्पादों की खरीदारी को प्राथमिकता दें। इससे ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार मिलेगा और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में सहयोग प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आज अपने हुनर, मेहनत और सामूहिक प्रयासों से दैनिक उपयोग की उच्च गुणवत्ता वाली सामग्रियों का उत्पादन कर रही हैं। बिहान योजना के माध्यम से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त एवं आत्मनिर्भर बन रही हैं। उनके उत्पाद अब ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी बाजारों में भी अपनी पहचान बना रहे हैं। इससे महिलाओं की आजीविका में वृद्धि होने के साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।




