मुस्कान-साहिल को फांसी सुनाने वाले जज क्यों चर्चा में? महाभारत का जिक्र और फिर पेन डस्टबिन में डालने की कहानी

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Meerut Saurabh Rajput Murder Case: मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाने वाले जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा इन दिनों चर्चा में हैं। मामले में दोनों को मौत की सजा सुनाए जाने के साथ ही फैसले से पहले महाभारत का संदर्भ देने और सजा सुनाने के बाद इस्तेमाल किए गए पेन को डस्टबिन में डालने की बात भी सुर्खियों में है। हालांकि, पेन को डस्टबिन में डालने के पीछे जज की मंशा को लेकर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

23 साल बाद मेरठ में सुनाई गई मृत्युदंड की सजा

सौरभ राजपूत हत्याकांड में करीब 13 महीने तक मुकदमे की सुनवाई चली। इस दौरान अदालत में 126 तारीखें पड़ीं। सुनवाई पूरी होने के बाद जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को हत्या का दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई।

इस फैसले को मेरठ के न्यायिक इतिहास की अहम घटना माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शहर में इससे पहले वर्ष 2003 में एक डॉक्टर को मृत्युदंड सुनाया गया था। इसके बाद करीब 23 साल के अंतराल पर इस मामले में दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई।

सजा सुनाने से पहले महाभारत का दिया संदर्भ

फैसले के दौरान जिला जज ने महाभारत का उल्लेख करते हुए न्याय और दंड के सिद्धांत पर अपनी बात रखी। उन्होंने अपराध के अनुरूप दंड दिए जाने को न्यायिक धर्म से जोड़कर समझाया। उनके कथन में कानून की भूमिका और समाज में सुरक्षा एवं व्यवस्था बनाए रखने के महत्व पर जोर था।

जज ने बाघ और जंगल का उदाहरण देते हुए कानून तथा समाज के संबंध को भी समझाने की कोशिश की। उनके कथन का आशय था कि कानून समाज की सुरक्षा और व्यवस्था के लिए जरूरी है। कानून मनुष्यों के व्यवहार को नियंत्रित करता है और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में भूमिका निभाता है।

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मृत्युदंड के आदेश के बाद पेन डस्टबिन में डालने की चर्चा

फैसला सुनाए जाने के बाद जज अरविंद कुमार मिश्रा द्वारा इस्तेमाल किए गए पेन को डस्टबिन में डालने की बात भी चर्चा में आई। चूंकि यह मामला दो लोगों को मृत्युदंड सुनाए जाने से जुड़ा था, इसलिए अदालत में किए गए इस कदम पर लोगों का ध्यान गया।

हालांकि, जज ने पेन को डस्टबिन में क्यों डाला, इस बारे में कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है। ऐसे में इस घटना को किसी विशेष भावना, परंपरा या मंशा से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा। फिलहाल, फैसले के दौरान महाभारत का संदर्भ और पेन से जुड़ी घटना चर्चा का विषय बनी हुई है।

पांच महीने पहले ही संभाला था मेरठ में पदभार

जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा को मेरठ में पदभार संभाले करीब पांच महीने हुए थे। इसी दौरान उनके सामने सौरभ राजपूत हत्याकांड का मुकदमा आया, जिसने देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं।

अदालत ने 30 सितंबर को मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी ठहराया था। इसके करीब दो सप्ताह बाद दोनों को मृत्युदंड सुनाया गया।

क्या था सौरभ राजपूत हत्याकांड?

मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला पर सौरभ राजपूत की हत्या करने और शव के टुकड़े कर उन्हें नीले ड्रम में छिपाने का आरोप था। इस घटना ने देशभर में लोगों का ध्यान खींचा था।

लंबी सुनवाई के बाद अदालत का फैसला सामने आया। अब इस मामले में मृत्युदंड के फैसले के साथ जज की टिप्पणियों और अदालत में उनके व्यवहार से जुड़ी चर्चाएं भी सुर्खियों में हैं।

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