H1N1 का बढ़ा खतरा! 103-104°F तक पहुंच रहा बुखार, जानें स्वाइन फ्लू और कोविड में अंतर; इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत

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देश के कई हिस्सों में इन दिनों वायरल संक्रमण और फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कई लोगों में तेज बुखार 103-104 डिग्री फॉरेनहाइट तक पहुंच रहा है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा समय में इन्फ्लुएंजा और कोविड जैसे श्वसन संक्रमण के लक्षण कई बार एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर दोनों में अंतर करना हमेशा संभव नहीं होता।

H1N1 को आम भाषा में स्वाइन फ्लू कहा जाता है
प्रोफेसर डॉक्टर संजीव बगाई (चेयरमैन नेफ्रॉन क्लीनिक) के मुताबिक, H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस का एक स्ट्रेन है। इसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू कहा जाता है, हालांकि H1N1 के संदर्भ में यह नाम पूरी तरह सटीक नहीं माना जाता। इन्फ्लुएंजा वायरस समय के साथ अपने स्वरूप में बदलाव करता रहता है। वायरस में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को एंटीजेनिक ड्रिफ्ट कहा जाता है, जबकि बड़े बदलावों को एंटीजेनिक शिफ्ट कहा जाता है। इसी वजह से इन्फ्लुएंजा के खिलाफ वैक्सीन में भी समय-समय पर बदलाव किया जाता है, ताकि उस समय फैल रहे मुख्य स्ट्रेन के खिलाफ बेहतर सुरक्षा मिल सके।

H1N1 स्वाइन फ्लू से किसे लोगों को सावधान रहना चाहिए?

डॉक्टर संजीव बगाई ने बताया कि फ्लू और दूसरे सांस से जुड़े संक्रमणों से गंभीर बीमारी का खतरा कुछ लोगों में ज्यादा रहता है। इनमें खास तौर पर शामिल हैं-

  • 5 साल से कम उम्र के छोटे बच्चे
  • 65 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग
  • गर्भवती महिलाएं
  • कमजोर इम्युनिटी वाले लोग
  • अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोग
  • इम्यूनोसप्रेसेंट दवाएं लेने वाले मरीज
  • गंभीर डायबिटीज या हाइपरटेंशन वाले लोग
  • क्रॉनिक लंग डिजीज के मरीज
  • किडनी की बीमारी से जूझ रहे मरीज
  • ज्यादा मोटे लोगों को खतरा

इन लोगों में संक्रमण होने पर बीमारी गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए लक्षण दिखने पर डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है।

 

कोविड और फ्लू के लक्षणों में कैसे करें अंतर?

कोविड और इन्फ्लुएंजा दोनों में बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, शरीर में दर्द, थकान और सिरदर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर यह तय करना मुश्किल हो सकता है कि संक्रमण कोविड का है या फ्लू का। कोविड के शुरुआती दौर में स्वाद और गंध चले जाने को एक प्रमुख संकेत माना जाता था, लेकिन अब हर कोविड मरीज में ऐसा होना जरूरी नहीं है। इसलिए सिर्फ स्वाद या गंध सामान्य रहने के आधार पर कोविड को खारिज नहीं किया जा सकता। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से कोविड या इन्फ्लुएंजा की जांच कराई जा सकती है। खासकर हाई-रिस्क मरीजों में सही समय पर संक्रमण की पहचान और इलाज महत्वपूर्ण है।

संक्रमण से बचने के लिए N95 मास्क और दूरी मददगार
डॉक्टर स्वाति माहेश्वरी (इंटरनल मेडिसिन, मणिपाल हॉस्पिटल) का कहना है कि जिस तरह कोविड के दौरान संक्रमण से बचने के लिए सावधानियां अपनाई जाती थीं, उनमें से कई उपाय H1N1 से निपटने में भी प्रभावी हैं। संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान निकलने वाली सांस की बूंदों और एरोसोल से संक्रमण फैल सकता है। इसलिए भीड़भाड़ वाली जगहों, सार्वजनिक परिवहन, बाजार और स्कूल जैसे स्थानों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। अगर आसपास कोई व्यक्ति लगातार खांस या छींक रहा है तो उससे उचित दूरी रखना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर अच्छी तरह फिट होने वाला N95 मास्क भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

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बीमार हैं तो स्कूल और ऑफिस जाने से बचें

अगर किसी व्यक्ति को बुखार, खांसी या सर्दी-जुकाम जैसे संक्रमण के लक्षण हैं तो उसे सामान्य गतिविधियां कम करनी चाहिए और दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। बीमार होने के बावजूद स्कूल या ऑफिस जाने से संक्रमण दूसरे लोगों तक फैल सकता है। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकना चाहिए। हाथों की साफ-सफाई का भी ध्यान रखना जरूरी है।

बंद जगहों में वेंटिलेशन का रखें ध्यान

डॉक्टर ने बताया बंद और कम वेंटिलेशन वाले कमरों में सांस संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए ऑफिस, स्कूल या घर में जहां संभव हो, पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना चाहिए और लंबे समय तक भीड़भाड़ वाले बंद स्थानों में रहने से बचना चाहिए।

पानी पिएं, आराम करें और खुद से दवा न लें

वायरल संक्रमण के दौरान शरीर को पर्याप्त आराम और तरल पदार्थों की जरूरत होती है। इसलिए पर्याप्त पानी और दूसरे लिक्विड डाइट लेते रहें। संतुलित आहार में फल और सब्जियां शामिल करें। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तेज बुखार या अन्य लक्षण होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या दूसरी दवाएं शुरू न करें। वायरल संक्रमण में हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती।

कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?

अगर बुखार लगातार बना हुआ है, लक्षणों में सुधार नहीं हो रहा है या मरीज की हालत बिगड़ रही है तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति, शरीर में पानी की कमी या लगातार बिगड़ते लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए। विशेषज्ञों की सलाह है कि हाई-रिस्क समूह के लोगों में लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह, पर्याप्त आराम और संक्रमण से बचाव की सावधानियां बीमारी को गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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