‘बच्चों को अपनी संतान समझें, पोटाकेबिन को अपना घर बनाएं’… सुकमा में शिक्षा मंत्री के सख्त निर्देश, पढ़ाई से सुरक्षा तक बदलेगी व्यवस्था

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सुकमा :कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में गुरुवार को पोटाकेबिन, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय और राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अधीक्षकों एवं कर्मचारियों की जिलास्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य, अनुशासन और संस्कारों को लेकर अधिकारियों एवं व्यवस्थापकों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में शिक्षा मंत्री ने कहा कि पोटाकेबिन और आश्रमों में काम करने वाले कर्मचारी इन संस्थानों को केवल अपनी ड्यूटी की जगह न समझें, बल्कि इन्हें अपना घर और वहां रहने वाले बच्चों को अपनी संतान समझकर जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि बच्चों को सुबह जागने से लेकर रात सोने तक सुरक्षित, अनुशासित और पारिवारिक वातावरण मिलना चाहिए।

सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही पर होगी कार्रवाई

शिक्षा मंत्री ने छात्रावासों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया। उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी को नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करने और निरीक्षण में लापरवाही बरतने वाले अधीक्षकों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। पारदर्शी निरीक्षण व्यवस्था के लिए रोस्टर प्रणाली लागू करने को भी कहा गया।

छात्रावास परिसर और भोजनालय में बाहरी अथवा संदिग्ध लोगों के अनधिकृत प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

रोजाना कम से कम चार घंटे गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई

बैठक में बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया। शिक्षा मंत्री ने पोटाकेबिनों में प्रतिदिन न्यूनतम चार घंटे गुणवत्तापूर्ण अध्ययन के लिए प्रभावी टाइम-टेबल तैयार करने के निर्देश दिए।

उन्होंने टीवी, प्रोजेक्टर और विज्ञान प्रयोगशालाओं का नियमित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने को कहा, ताकि दूरस्थ वनांचल के बच्चों को भी आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों का लाभ मिल सके।

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खेल, व्यायाम और संस्कारों पर भी जोर

मंत्री ने बच्चों की दिनचर्या को व्यवस्थित करने के निर्देश देते हुए दिन की शुरुआत पीटी, व्यायाम और खेल गतिविधियों से कराने पर जोर दिया। इसके बाद मां दंतेश्वरी की वंदना, भोजन से पहले भोजन मंत्र तथा शाम के समय आरती-भजन जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करने के निर्देश दिए गए।

इसका उद्देश्य बच्चों में अनुशासन, स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सांस्कृतिक संस्कारों का विकास करना है।

शहीदों की गाथाओं से प्रेरित होंगे बच्चे

शिक्षा मंत्री ने स्थानीय इतिहास और क्षेत्र के वीरों की गाथाओं को बच्चों तक पहुंचाने की भी पहल की। उन्होंने निर्देश दिए कि ‘संवारी बैगलेस डे’ के दौरान बच्चों को सुकमा की धरती पर नक्सल मुठभेड़ों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों की गाथाएं सुनाई जाएं, ताकि बच्चे अपने क्षेत्र के वीरों के त्याग और साहस से प्रेरणा ले सकें।

छात्राओं के आत्मविश्वास और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महिला कमांडेंट के माध्यम से सेल्फ डिफेंस प्रशिक्षण कराने तथा स्काउट-गाइड्स को पुलिस विभाग के सहयोग से बैंड का विधिवत प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए गए।

हर महीने स्वास्थ्य परीक्षण, अनुपस्थित बच्चों पर नजर

बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए हर माह अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए गए। लंबे अवकाश के बाद लौटने वाले विद्यार्थियों की विशेष मेडिकल जांच कराने को भी कहा गया।

बिना सूचना लंबे समय तक अनुपस्थित रहने वाले बच्चों के परिजनों से अधीक्षकों को सीधे संपर्क करने के निर्देश दिए गए। वहीं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त सफाई कर्मचारियों की व्यवस्था करने की बात कही गई।

बैठक में कलेक्टर श्री अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकुंद ठाकुर सहित संबंधित अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। बैठक के समापन पर कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ ने शिक्षा मंत्री को स्मृति चिह्न के रूप में भगवान गणेश की प्रतिमा भेंट की।

इस दौरान शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव ने पुलिस विभाग द्वारा संचालित साइबर जागरूकता कार्यक्रम के तहत सेल्फी लेकर लोगों को डिजिटल जागरूकता का संदेश भी दिया।

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