बेमेतरा टेकेश्वर दुबे:राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा के तहत बेमेतरा जिले में 25 अगस्त से 8 सितंबर तक नेत्रदान जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। राज्य शासन के निर्देश पर कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाई एवं सीएमएचओ डॉ. अमृत लाल रोहलेडर के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिले के सभी विकासखंडों में रैली, संगोष्ठी और अन्य माध्यमों से जनजागरूकता बढ़ाई जा रही है।
इसी क्रम में 3 सितंबर को जिला चिकित्सालय बेमेतरा में सिविल सर्जन डॉ. लोकेश साहू की अध्यक्षता में जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य मरणोपरांत नेत्रदान के महत्व को समझाना और समाज को इस महादान के लिए प्रेरित करना था।
कार्यक्रम में जिला अंधत्व निवारण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. बी.एल. राज और सिविल सर्जन डॉ. लोकेश साहू ने बताया –
– कॉर्निया में चोट या अन्य कारणों से सफेदी आने पर दृष्टि प्रभावित होती है, जिसे कॉर्नियल प्रत्यारोपण से वापस लाया जा सकता है।
– एक व्यक्ति के नेत्रदान से 2 दृष्टिबाधित व्यक्तियों के जीवन में रोशनी लौटाई जा सकती है।
– सामान्यतः 5 से 60 वर्ष की आयु के स्वस्थ व्यक्तियों की आंखें दान के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं।
– रेबीज, टिटनेस, हेपेटाइटिस, सर्पदंश, जहर सेवन, जलने या डूबने से हुई मृत्यु में नेत्रदान उपयुक्त नहीं माना जाता।
– नेत्रदान के लिए जटिल औपचारिकता नहीं है। परिजनों की सहमति से चिकित्सकीय टीम द्वारा प्रक्रिया पूरी की जाती है।
– मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक है, इसलिए परिजनों को तुरंत सूचना देनी चाहिए।
सिविल सर्जन डॉ. साहू ने कहा कि भारतीय संस्कृति में नेत्रदान को महादान कहा गया है।
वरिष्ठ नेत्र सहायक अधिकारी बघेल ने बताया कि जिला अंधत्व निवारण समिति के सहयोग से जिले में अब तक 3 व्यक्तियों द्वारा नेत्रदान किया जा चुका है। स्वस्थ शरीर वाले, कैंसर संक्रमण से मुक्त मृत व्यक्ति का नेत्रदान संभव है।
कार्यक्रम में नेत्र रोग विशेषज्ञ, जिले के सभी नेत्र सहायक अधिकारी, जिला चिकित्सालय के अधिकारी-कर्मचारी, मरीज और उनके परिजन उपस्थित रहे।




