चुनावी घोषणा के ढाई साल बाद भी नहीं मिला हक, कमेटी की रिपोर्ट पर भी उठे सवाल; मांग पूरी नहीं हुई तो कामकाज बहिष्कार और आंदोलन की चेतावनी
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद : ग्राम पंचायतों में कार्यरत पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की वर्षों पुरानी मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। चुनावी घोषणा के बावजूद मांग पूरी नहीं होने से पंचायत सचिव संगठन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। सचिव संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही शासकीयकरण की दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया, तो संगठन एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगा।सचिव संघ ब्लॉक इकाई छुरा के अध्यक्ष चेतन सोनकर ने बताया कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी द्वारा जारी चुनावी घोषणा पत्र में ग्राम पंचायतों में कार्यरत सचिवों के शासकीयकरण का वादा किया गया था। संगठन का कहना है कि सरकार बनने के बाद 100 दिनों के भीतर शासकीयकरण किए जाने की बात कही गई थी, लेकिन सरकार के गठन को ढाई साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।
कमेटी बनी, लेकिन रिपोर्ट का इंतजार
सचिव संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार 7 जुलाई 2024 को रायपुर के इंडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री द्वारा पंचायत सचिवों के शासकीयकरण के लिए कमेटी गठित कर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने की बात कही गई थी। संगठन का आरोप है कि निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है। सचिवों का कहना है कि बार-बार कमेटियां गठित किए जाने से उनकी मांग का समाधान होने के बजाय मामला लगातार लंबित होता जा रहा है।जिला सचिव संघ गरियाबंद के अध्यक्ष प्रवीण साहू ने कहा कि संगठन ने सरकार पर भरोसा बनाए रखा है, लेकिन अब धैर्य जवाब देने लगा है। उन्होंने कहा कि यदि चुनावी घोषणा के अनुरूप सचिवों का शासकीयकरण नहीं किया गया तो संगठन शासन के विभिन्न कार्यों का बहिष्कार करते हुए पुनः आंदोलन के लिए लामबंद होगा। इसकी जिम्मेदारी शासन की होगी।
29 विभागों के 200 से अधिक कार्यों की जिम्मेदारी
सचिव संघ का कहना है कि ग्राम पंचायत सचिवों पर पंचायत स्तर से जुड़े ही नहीं, बल्कि विभिन्न शासकीय योजनाओं और विभागीय कार्यों की बड़ी जिम्मेदारी होती है। संगठन के अनुसार सचिवों के माध्यम से 29 विभागों के 200 से अधिक प्रकार के कार्यों का संचालन किया जाता है तथा शासन की योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में ग्राम पंचायत सचिव महत्वपूर्ण कड़ी हैं।सचिवों का दावा है कि उनके कार्य की प्रकृति ऐसी है जिसमें निश्चित समय-सीमा तय करना मुश्किल होता है। कई बार सुबह से देर रात तक पंचायत एवं शासकीय कार्यों में लगे रहना पड़ता है। इसके बावजूद ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर अनावश्यक दबाव बनाए जाने पर भी संगठन ने नाराजगी जताई है।
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ऑनलाइन अटेंडेंस को लेकर भी विरोध
प्रवीण साहू और चेतन सोनकर ने बताया कि गरियाबंद जिले में पंचायत सचिवों को ऑनलाइन अटेंडेंस देने के लिए बाध्य किया जा रहा है। संगठन का कहना है कि सचिवों के कार्य की प्रकृति और मैदानी जिम्मेदारियों को देखते हुए इस व्यवस्था को लेकर व्यावहारिक समस्याएं हैं। इस संबंध में जिला स्तर पर ज्ञापन सौंपने की तैयारी की जा रही है।संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि सचिवों पर अनावश्यक दबाव बनाकर परेशान किया गया तो ऐसे मामलों को लेकर भी संघ आंदोलनात्मक रुख अपनाने से पीछे नहीं हटेगा।
हड़ताल अवधि के वेतन भुगतान का मामला भी अटका
सचिव संघ ने शासकीयकरण के साथ-साथ पिछले वर्ष की हड़ताल अवधि के वेतन भुगतान का मुद्दा भी उठाया है। संगठन का कहना है कि हड़ताल अवधि के वेतन भुगतान को लेकर शासन स्तर से आदेश जारी होने के बावजूद जिला स्तर पर अब तक भुगतान नहीं किया गया है।सचिवों का आरोप है कि हर महीने वेतन के लिए भी इंतजार करना पड़ता है। इस संबंध में कई बार ज्ञापन दिए जाने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। जिला पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर सचिव संघ में नाराजगी बढ़ रही है।
सरकार से वादा निभाने की अपील
सचिव संघ के जिला अध्यक्ष प्रवीण साहू और छुरा ब्लॉक अध्यक्ष चेतन सोनकर ने मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री से चुनावी घोषणा को पूरा करते हुए ग्राम पंचायतों में कार्यरत लगभग 11 हजार पंचायत सचिवों के शासकीयकरण की मांग की है। उन्होंने कहा कि सचिव वर्षों से पंचायत व्यवस्था की रीढ़ के रूप में कार्य कर रहे हैं, इसलिए अब सरकार को उनके भविष्य को लेकर स्पष्ट और ठोस निर्णय लेना चाहिए।संगठन ने कहा है कि यदि मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो जिला स्तर पर आंदोलन का बिगुल फूंका जाएगा। सचिव संघ ने दो टूक कहा कि सरकार यदि अपना वादा पूरा करती है तो संगठन सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन लगातार आश्वासन और कमेटियों के गठन से अब बात नहीं बनेगी।




