Navratri 2026: 19 अक्टूबर को होगी संधि पूजा, अष्टमी-नवमी के मिलन पर बनता है 48 मिनट का संधिकाल; जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

Spread the love

हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र को मां दुर्गा की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। वर्ष 2026 में शारदीय नवरात्र की शुरुआत 11 अक्टूबर से होगी और 20 अक्टूबर को विजयदशमी के साथ इसका समापन होगा। नवरात्र के दौरान महाअष्टमी और महानवमी का विशेष महत्व होता है। इन्हीं दोनों तिथियों के मिलन के समय की जाने वाली संधि पूजा को भी बेहद खास माना गया है।

अष्टमी और नवमी के बीच होता है संधिकाल

संधि पूजा उस विशेष समय में की जाती है, जब महाअष्टमी समाप्त होती है और महानवमी की शुरुआत होती है। अष्टमी और नवमी के इस मिलन बिंदु को संधिक्षण या संधिकाल कहा जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह समय आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। संधिकाल कुल 48 मिनट का होता है, जिसमें अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के शुरुआती 24 मिनट शामिल होते हैं।

ये भी पढ़े :6 अक्टूबर लव राशिफल: मिथुन के रिश्ते में बढ़ेगा प्यार, वृश्चिक को मनमुटाव करेगा परेशान, जानें सभी राशियों का हाल

2026 में कब होगी संधि पूजा?

द्रिक पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्र में इस वर्ष संधि पूजा 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को की जाएगी।

– अष्टमी तिथि प्रारंभ: 18 अक्टूबर 2026, सुबह 8:27 बजे
– अष्टमी तिथि समाप्त: 19 अक्टूबर 2026, सुबह 10:51 बजे
– संधि पूजा मुहूर्त: 19 अक्टूबर 2026, सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक
– कुल संधिकाल: 48 मिनट

संधि पूजा क्यों मानी जाती है खास?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संधि पूजा के दौरान अष्टमी और नवमी दोनों तिथियों की देवी शक्तियों का आह्वान किया जाता है। मान्यता है कि इसी संधिकाल में मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था। यही वजह है कि इस समय देवी की विशेष आराधना का विधान बताया गया है।

संधि पूजा के दौरान 108 दीपक जलाना शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर इस अवसर पर फल-सब्जियों की प्रतीकात्मक बलि देने की परंपरा भी निभाई जाती है। भक्त इस दौरान मां भगवती की पूजा, मंत्र जाप और आराधना करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

संधि पूजा का धार्मिक महत्व

नवरात्र में संधिकाल को मां दुर्गा की आराधना के लिए अत्यंत शुभ समय माना जाता है। अष्टमी के समापन और नवमी के आरंभ के इस विशेष काल में पूजा-पाठ, नाम जप और ध्यान करने से देवी की कृपा प्राप्त होने की धार्मिक मान्यता है।

संधि पूजा को शक्ति उपासना से जोड़कर देखा जाता है। भक्त इस दौरान मां दुर्गा से सुख-समृद्धि, शांति और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते हैं।

नोट: पूजा के मुहूर्त में स्थान के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। धार्मिक अनुष्ठान करने से पहले स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित से समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *