शारदीय नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्र के दौरान कई भक्त अपने घरों में विधि-विधान से घट या कलश स्थापना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कलश स्थापना के साथ घर में मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है, इसलिए इन दिनों घर की शुद्धता और पूजा के नियमों का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
मान्यता है कि नवरात्र के दौरान पूजा-पाठ के साथ-साथ खानपान, व्यवहार और घर के वातावरण को लेकर भी सावधानी बरतनी चाहिए। खासकर यदि घर में अखंड ज्योत जलाई गई है तो उसकी नियमित देखभाल जरूरी मानी जाती है।
ऐसे में जानिए घट स्थापना के बाद किन 3 गलतियों से बचने की सलाह दी जाती है।
1. घर को लंबे समय तक अकेला न छोड़ें
यदि आपने घर में घट स्थापना के साथ अखंड ज्योत जलाई है, तो उसकी देखभाल करना बेहद जरूरी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार अखंड ज्योत को लगातार जलते रहना चाहिए, इसलिए उसे बिना निगरानी के छोड़ने से बचना चाहिए।
नवरात्र के दौरान पूजा स्थल को साफ-सुथरा रखने और कलश की नियमित पूजा करने की परंपरा है। यदि घर से बाहर जाना जरूरी हो तो अखंड ज्योत की सुरक्षित व्यवस्था और पूजा स्थल की देखभाल सुनिश्चित करना बेहतर माना जाता है।
2. तामसिक भोजन से रहें दूर
नवरात्र में सात्विक भोजन का विशेष महत्व बताया गया है। जो लोग उपवास नहीं रखते, उन्हें भी इन नौ दिनों में अपनी खानपान की आदतों में संयम रखने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र के दौरान मांसाहार और मदिरा से परहेज किया जाता है। कई परिवार प्याज और लहसुन का सेवन भी नहीं करते। मान्यता है कि सात्विक भोजन से मन शांत रहता है और पूजा-पाठ में एकाग्रता बनाए रखने में मदद मिलती है।
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3. घर में कलह-कलेश से बचें
नवरात्र को देवी उपासना और आत्मिक शुद्धि का समय माना जाता है। ऐसे में घर के वातावरण को शांत और सकारात्मक बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए। परिवार के सदस्यों को बेवजह के विवाद, क्रोध और कटु शब्दों से बचने की सलाह दी जाती है।
घर में प्रेम और सौहार्द का वातावरण रहने से पूजा-पाठ में मन लगाने में आसानी होती है। इसलिए नवरात्र के नौ दिनों में आपसी मतभेदों को बढ़ाने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत करना बेहतर माना जाता है।
पूजा के दौरान रखें सकारात्मक माहौल
अगर आपने शारदीय नवरात्र में घर पर घट स्थापना की है, तो पूजा स्थल की स्वच्छता, नियमित पूजा, सात्विक आहार और शांत वातावरण पर ध्यान दें। ये बातें धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ी हैं। अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में नियमों में कुछ अंतर भी हो सकता है।
नवरात्र के दौरान श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा करना ही सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।




