कलेक्टर का सख्त निर्देश : आधार आधारित उपस्थिति और ई-ऑफिस अनिवार्य, लापरवाही पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

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बेमेतरा टेकेश्वर दुबे :  जिले में शासकीय कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने मंगलवार को आयोजित समय-सीमा की साप्ताहिक समीक्षा बैठक में सभी विभागाध्यक्षों एवं कार्यालय प्रमुखों को निर्देश दिए कि अब सभी कार्यालयों में आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति और ई-ऑफिस प्रणाली का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्देशों की अवहेलना करने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

आधार आधारित उपस्थिति होगी अनिवार्य

कलेक्टर ने सभी विभाग प्रमुखों को निर्देशित किया कि अपने अधीनस्थ कार्यालयों में अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति आधार आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से ही दर्ज कराई जाए। उन्होंने कहा कि सभी कर्मचारियों की प्रतिदिन सुबह 10 बजे से पहले तथा शाम 5:30 बजे के बाद अनिवार्य रूप से बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज होनी चाहिए। साथ ही प्रत्येक कार्यालय दिवस में कम से कम 7 घंटे 30 मिनट की उपस्थिति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।

उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि मैन्युअल उपस्थिति पंजी को चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाए। नियमित रूप से निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं होने वालों के विरुद्ध वेतन कटौती सहित अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

ई-ऑफिस से होगा कार्यालयीन पत्राचार

कलेक्टर ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि कार्यालयीन पत्राचार एवं फाइलों का संचालन पूरी तरह ई-ऑफिस प्रणाली के माध्यम से किया जाए। उन्होंने कहा कि कागज आधारित फाइलों का उपयोग न्यूनतम रखा जाए, जिससे फाइलों की ट्रैकिंग आसान हो, कार्यों में पारदर्शिता बढ़े तथा अनावश्यक विलंब समाप्त हो।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणाली अपनाने से न केवल प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आम नागरिकों को भी समयबद्ध और बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।

लंबित प्रकरणों पर जताई नाराजगी

बैठक के दौरान कलेक्टर ने विभिन्न विभागों में लंबित प्रकरणों तथा धीमी गति से चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी स्तर पर फाइलें लंबित रहती हैं अथवा आम जनता के कार्य समय पर नहीं किए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्य करना नहीं, बल्कि निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करना है।

निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और गति पर विशेष जोर

कलेक्टर ने जिले में लंबित राजस्व प्रकरणों, प्रधानमंत्री आवास योजना, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण से संबंधित मामलों, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा तथा अन्य निर्माण कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने पर विशेष जोर दिया।

इसके साथ ही उन्होंने जनशिकायतों की समीक्षा करते हुए सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करें तथा प्रत्येक 15 दिनों में प्रगति रिपोर्ट जिला कार्यालय को भेजें।

प्रशासन का स्पष्ट संदेश

कलेक्टर के इन निर्देशों से जिले के शासकीय कार्यालयों में समयबद्ध उपस्थिति, ई-ऑफिस के माध्यम से फाइलों का त्वरित निष्पादन तथा लंबित प्रकरणों के शीघ्र निराकरण को गति मिलने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल कार्यप्रणाली से पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी एवं समय पर मिल सकेगा।

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