रूवाड़ में 4-5 दिनों से जारी है आंदोलन, धरना स्थल पर ही ग्रामीणों और स्कूली बच्चों ने किया ध्वजारोहण; 8-10 वर्षों से भवन निर्माण की मांग, अब लिखित आश्वासन पर अड़े ग्रामीण
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/ छुरा : देशभर में जब 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा था और गांव-गांव तिरंगा फहराकर आजादी का पर्व मनाया जा रहा था, वहीं गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम रूवाड़ में ग्रामीण अपने बच्चों के लिए विद्यालय भवन की मांग को लेकर धरने पर बैठे रहे। आजादी के जश्न के बीच सामने आई यह तस्वीर क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था और ग्रामीण अंचलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर रही है।रूवाड़ के ग्रामीण पिछले करीब 8 से 10 वर्षों से विद्यालय भवन निर्माण की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से शासन-प्रशासन और संबंधित विभाग के समक्ष मांग रखने के बावजूद अब तक विद्यालय भवन निर्माण को लेकर कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। लगातार उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी कर विद्यालय भवन के सामने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों का आंदोलन पिछले चार से पांच दिनों से लगातार जारी है। धरना शुरू होने के पहले दिन एसडीएम, तहसीलदार, ब्लाक शिक्षा अधिकारी सहित प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी समस्याएं सुनी थीं। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार बातचीत के बाद भी विद्यालय भवन निर्माण को लेकर कोई ठोस और स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया। इसके बाद ग्रामीणों ने अपना आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों और पालकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक विद्यालय भवन निर्माण को लेकर लिखित एवं स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया जाता, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
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15 अगस्त को धरना स्थल पर ही फहराया तिरंगा
आंदोलन की सबसे उल्लेखनीय तस्वीर स्वतंत्रता दिवस के दिन देखने को मिली। जब देशभर में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे थे, वहीं रूवाड़ के ग्रामीण पालक और स्कूली बच्चे विद्यालय भवन की मांग को लेकर धरना स्थल पर मौजूद रहे। ग्रामीणों और बच्चों ने धरना स्थल पर ही स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान किया। वहीं विद्यालय में सिर्फ शिक्षकों ने बिना स्कुली बच्चों की उपस्थिति में तिरंगा फहराया।यह दृश्य एक ओर देश की आजादी के गौरव को प्रदर्शित कर रहा था, तो दूसरी ओर ग्रामीणों की बुनियादी शैक्षणिक सुविधा को लेकर जारी संघर्ष को भी सामने ला रहा था।
भवन नहीं मिलने से बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा असर
ग्रामीणों की चिंता केवल विद्यालय भवन के निर्माण तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि विद्यालय भवन की समस्या के कारण बच्चों को पढ़ाई के लिए उचित वातावरण नहीं मिल पा रहा है। यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ और पालक मजबूरी में बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देते हैं, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा पर पड़ेगा।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात करती है, लेकिन रूवाड़ जैसे गांव में बच्चों के लिए एक उचित विद्यालय भवन की मांग पूरी कराने के लिए पालकों और ग्रामीणों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
करोड़ों के शिक्षा बजट के बीच उठे सवाल
छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026-27 में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 22 हजार 466 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। ऐसे में रूवाड़ के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी विद्यालय भवन की मांग को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतने बड़े शिक्षा बजट के बावजूद गांव के बच्चों को भवन जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आंदोलन क्यों करना पड़ रहा है?ग्रामीणों का सवाल है कि क्या रूवाड़ के विद्यालय भवन को निर्माण योजना में शामिल किया गया है? यदि भवन निर्माण की स्वीकृति हो चुकी है तो निर्माण कार्य कब शुरू होगा? यदि स्वीकृति नहीं हुई है तो वर्षों से मांग कर रहे ग्रामीणों की मांग को योजना में कब शामिल किया जाएगा?
आश्वासन नहीं, अब ठोस निर्णय की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से केवल मौखिक आश्वासन देने के बजाय विद्यालय भवन की स्वीकृति, बजट प्रावधान और निर्माण कार्य शुरू होने की समयसीमा स्पष्ट करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने अपनी समस्या रखते आ रहे हैं, लेकिन अब वे ठोस निर्णय के बिना आंदोलन समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं।
फिलहाल रूवाड़ में ग्रामीणों का धरना जारी है। स्वतंत्रता दिवस के दिन भी धरना स्थल पर डटे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की तस्वीर शासन-प्रशासन के लिए एक गंभीर सवाल छोड़ रही है—आजादी के 80 साल बाद भी क्या गांव के बच्चों को अपने विद्यालय भवन के लिए सड़क पर उतरकर आंदोलन करना पड़ेगा?अब देखना होगा कि रूवाड़ के ग्रामीणों की वर्षों पुरानी मांग पर प्रशासन और शासन कब तक ठोस निर्णय लेता है और विद्यालय भवन निर्माण की दिशा में वास्तविक कार्रवाई कब शुरू होती है।






