धान से राखियां और बैज बनाकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रहीं बिहान की दीदियां

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गोलू कैवर्त बलौदाबाजार : रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस बार बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में यह त्योहार केवल रिश्तों की मिठास तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की मेहनत, प्रकृति के प्रति सम्मान और महिला सशक्तिकरण का भी संदेश देगा। जिला पंचायत बलौदाबाजार एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के सहयोग से लाहोद क्लस्टर की स्व-सहायता समूह की दीदियों ने “भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार” थीम पर धान से आकर्षक राखियां और बैज तैयार किए हैं।

कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन एवं जिला पंचायत सीईओ सुश्री दिव्या अग्रवाल के नेतृत्व में शुरू हुई यह अभिनव पहल पारंपरिक रक्षाबंधन को कृषि और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का एक सुंदर प्रयास है। धान के बीजों से बनी ये राखियां केवल एक धागा नहीं, बल्कि अन्नदाता किसानों के श्रम, हरियाली और समृद्धि का प्रतीक हैं। इन्हें देखकर हर किसी के मन में अपनी मिट्टी और खेती के प्रति अपनापन और सम्मान का भाव स्वतः जागृत होता है।

लाहोद क्लस्टर की लगभग 7 से 8 स्व-सहायता समूह की करीब 150 दीदियां पूरे उत्साह और लगन से धान के बीजों को कलात्मक रूप देकर राखियां और बैज तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की बिक्री स्थानीय हाट-बाजारों और विभिन्न आयोजनों में की जा रही है, जिससे महिलाओं को अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। इससे पहले वे अलग अलग समूह में आचार, पापड़, इमली लाटा, साबुन – निरमा आदि अनेकों उपयोगी सामान बनाकर बेचकर सालाना लाखों रुपए का आय अर्जित करती थी। यह पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को सशक्त बना रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी नई पहचान दिला रही है।

बिहान की दीदियों का कहना है कि कभी वे केवल घर-परिवार की जिम्मेदारियों तक सीमित थीं, लेकिन आज शासन की योजनाओं से जुड़कर आत्मविश्वास के साथ नए-नए आजीविका गतिविधियों में भाग ले रही हैं। धान से राखियां तैयार करने जैसी रचनात्मक पहल ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया है। वे इस अवसर के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि शासन की योजनाओं ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है।

बिहान की यह अनूठी पहल इस रक्षाबंधन पर प्रेम, प्रकृति, कृषि और आत्मनिर्भरता का संदेश एक साथ दे रही है। धान के बीजों से सजी ये राखियां न केवल भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करेंगी, बल्कि हर कलाई पर किसान के सम्मान और धरती मां के प्रति कृतज्ञता का भाव भी बांधेंगी।

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