लिवर खराब होने का इंतजार न करें! ये 5 जरूरी टेस्ट बताएंगे अंदर से कैसी है आपके लिवर की सेहत

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शरीर का सबसे बड़ा, मजबूत और महत्वपूर्ण अंग हमारा लिवर है। लिवर खाना पचाने, शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने, एनर्जी स्टोर करने और कई जरूरी प्रोटीन बनाने का काम करता है। लेकिन समस्या यह है कि लिवर की कई बीमारियां शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखातीं। जब तक थकान, पीलिया, पेट में सूजन या तेज दर्द जैसे संकेत दिखाई देते हैं, तब तक कई मामलों में बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। इसीलिए केवल लक्षणों का इंतजार करने के बजाय समय पर जांच कराना बेहतर होता है। एगिलस डायग्नोस्टिक्स पैथोलॉजी लैब से मिली जानकारी के मुताबिक आपको लिवर के लिए ये टेस्ट जरूर कराने चाहिए?

लिवर की जांच कौन सी होती है? (Best Test For Liver)  

लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT)- यह सबसे जरूरी जांचों में से एक है। इसमें SGOT (AST), SGPT (ALT), बिलीरुबिन और अन्य पैरामीटर देखे जाते हैं, जिनसे पता चलता है कि लिवर सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं। फैटी लिवर, हेपेटाइटिस और अन्य लिवर संबंधी समस्याओं के शुरुआती संकेत इससे मिल सकते हैं।

हेपेटाइटिस बी और सी की जांच-हेपेटाइटिस बी और सी वायरस लंबे समय तक बिना किसी लक्षण के शरीर में रह सकते हैं और धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। समय पर इनकी पहचान होने से इलाज शुरू किया जा सकता है और गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है।

फैटी लिवर की स्क्रीनिंग- आज के समय में गलत खानपान, मोटापा, डायबिटीज और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टर की सलाह पर ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड जैसी जांच से इसकी पहचान की जा सकती है। इससे फैटी लिवर का पता लगाया जा सकता है।

लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर टेस्ट- कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर का असंतुलन भी लिवर की सेहत को प्रभावित करता है। अगर ये स्तर लगातार बढ़े रहें तो फैटी लिवर और अन्य मेटाबॉलिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए इनकी नियमित जांच भी जरूरी है।

फाइब्रोसिस या लिवर डैमेज की जांच- अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से फैटी लिवर, हेपेटाइटिस या शराब के अधिक सेवन का इतिहास है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार ऐसी जांच की सलाह दे सकते हैं, जिससे यह पता चलता है कि लिवर में स्थायी नुकसान या फाइब्रोसिस तो नहीं हो रही।

लिवर की देखभाल केवल जांच तक सीमित नहीं है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, स्वस्थ वजन बनाए रखना, शराब का सीमित या बिल्कुल सेवन न करना और डॉक्टर की सलाह के बिना दवाइयां न लेना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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