डायवर्सन के लिए वर्षों से दफ्तरों के चक्कर काट रहा आदिवासी किसान, दूसरे के अर्थदंड ने अटका रखा अपना प्रकरण!

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तहसील में दो साल चली पेशी, फिर अनुविभागीय कार्यालय में भी करीब दो साल से सुनवाई; अलग जमीन और अलग प्रकरण होने के बावजूद मामले को जोड़ने पर उठे सवाल

 

परमेश्वर राजपूत,गरियाबंद/छुरा : राजस्व मामलों के त्वरित निराकरण के लिए जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर अधिकारियों को निर्देश दिए जाने के बावजूद ग्रामीण किसानों के प्रकरण लंबे समय तक लंबित रहने का मामला सामने आया है। ग्राम पथर्री निवासी आदिवासी कृषक कलिंग साय अपने डायवर्सन प्रकरण के निराकरण के लिए वर्षों से तहसील और अनुविभागीय कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। किसान का कहना है कि सामान्य राजस्व कार्य के लिए उसे लगातार पेशियों और कार्यालयीन प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, लेकिन अब तक मामले का अंतिम निराकरण नहीं हो सका है।जानकारी के अनुसार कृषक कलिंग साय ने अपनी भूमि के डायवर्सन के लिए संबंधित राजस्व कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। आवेदन के बाद प्रकरण की प्रक्रिया तहसील कार्यालय में चली, जहां करीब दो वर्षों तक पेशी और सुनवाई होने की बात सामने आई है। इसके बाद मामला अनुविभागीय कार्यालय पहुंचा, जहां भी करीब दो वर्षों से सुनवाई और पेशी का सिलसिला जारी बताया जा रहा है। लंबे समय से चल रही इस प्रक्रिया के कारण किसान को आर्थिक खर्च के साथ-साथ समय और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दूसरे व्यक्ति के अर्थदंड का मामला बना परेशानी का कारण
किसान कलिंग साय का आरोप है कि उसके डायवर्सन प्रकरण के लंबित रहने का एक प्रमुख कारण उसके बाजू की भूमि से संबंधित दूसरे व्यक्ति का अर्थदंड बताया जा रहा है। राजस्व विभाग द्वारा कलिंग साय के मामले में अवैध निर्माण को लेकर अर्थदंड लगाए जाने की जानकारी है। वहीं समीपस्थ भूमि के मालिक प्रमोद दीवान पर भी अवैध निर्माण के संबंध में अर्थदंड लगाया गया था। विभाग द्वारा उन्हें कथित तौर पर दो बार नोटिस देकर अर्थदंड जमा करने का अवसर दिया गया, लेकिन राशि जमा नहीं किए जाने के कारण ऑनलाइन पोर्टल पर संबंधित प्रकरण के निराकरण की प्रक्रिया प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।किसान का कहना है कि कलिंग साय और प्रमोद दीवान अलग-अलग व्यक्ति हैं तथा दोनों की भूमि के खसरा नंबर भी अलग हैं। ऐसे में एक व्यक्ति के प्रकरण में दूसरे व्यक्ति के अर्थदंड का प्रभाव क्यों पड़ रहा है, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। किसान ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।

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अर्थदंड नहीं पटाने वाले के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?
कलिंग साय का कहना है कि यदि दूसरे पक्ष द्वारा अर्थदंड जमा नहीं किया जा रहा है और वह राजस्व न्यायालय की पेशी में भी उपस्थित नहीं हो रहा है, तो विभाग द्वारा नियमानुसार उसके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए। लेकिन दूसरे व्यक्ति की कथित लापरवाही का असर उसके वैधानिक राजस्व कार्य पर पड़ना उचित नहीं है। उनका कहना है कि एक किसान को अपने प्रकरण के निराकरण के लिए वर्षों तक कार्यालयों की दौड़ लगानी पड़े, यह प्रशासनिक व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़ा करता है।

फिर कलेक्टर जनदर्शन में लगाएंगे गुहार
लंबे समय से लंबित प्रकरण से परेशान कृषक कलिंग साय अब एक बार फिर गरियाबंद कलेक्टर के जनदर्शन में आवेदन प्रस्तुत कर पूरे मामले की शिकायत करने की तैयारी में हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि उनके डायवर्सन प्रकरण की पूरी फाइल की समीक्षा कर यह स्पष्ट किया जाए कि उनका प्रकरण किस कारण से लंबित है और दूसरे व्यक्ति के अर्थदंड से उनके मामले की प्रक्रिया क्यों प्रभावित हो रही है। साथ ही नियमानुसार शीघ्र निराकरण कर उन्हें वर्षों से चल रही कार्यालयीन दौड़ से राहत दिलाई जाए।

राजस्व प्रकरणों के शीघ्र निराकरण और लंबित मामलों को समय-सीमा में निपटाने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। ऐसे में ग्राम पथर्री के कृषक कलिंग साय का वर्षों से लंबित डायवर्सन प्रकरण राजस्व प्रक्रिया की जटिलता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि कलेक्टर जनदर्शन में किसान द्वारा दोबारा आवेदन दिए जाने के बाद प्रशासन इस मामले की समीक्षा कर कितनी शीघ्र कार्रवाई करता है।

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