“हेलो-हेलो कंट्रोल रूम… 5 लोग बाढ़ में फंसे हैं!” कॉल मिलते ही दौड़ी NDRF, CPR देकर बचाई बच्चे की जान

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बेमेतरा टेकेश्वर दुबे :जिले में लगातार हो रही बारिश के बीच नदी-नाले उफान पर हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए गुरुवार को मॉकड्रिल आयोजित की गई। मॉकड्रिल के दौरान कंट्रोल रूम में अचानक सूचना पहुंची—“हेलो-हेलो कंट्रोल रूम… अमोरा घाट में बाढ़ आने से 5 लोग पानी में फंस गए हैं।” सूचना मिलते ही जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग की टीमों को सक्रिय किया। कुछ ही समय में एनडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और बाढ़ में फंसे पांचों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

मॉकड्रिल का उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय तथा रेस्क्यू व्यवस्था की तैयारियों को प्रदर्शित करना था। इस दौरान वास्तविक आपदा जैसी परिस्थितियां निर्मित कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास कराया गया।

अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर, खेत में फंसे पांच लोग

मॉकड्रिल के तहत बेमेतरा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम अमेरा के समीप नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने की स्थिति प्रदर्शित की गई। खेत में काम कर रहे दो पुरुष, दो महिलाएं और एक बच्चा तेज जल बहाव के बीच फंस गए। पानी लगातार बढ़ने पर सभी ऊंचे स्थान पर पहुंचकर मदद के लिए आवाज लगाने लगे। ग्रामीणों ने तत्काल डायल 112 और जिला कंट्रोल रूम को इसकी सूचना दी।

सूचना मिलते ही कलेक्टर प्रतिष्ठा ममगाईं ने एनडीआरएफ की रायपुर यूनिट को तत्काल सूचना देकर रेस्क्यू टीम रवाना करने के निर्देश दिए। साथ ही स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस को भी अलर्ट किया गया।

रबर बोट और रस्सियों की मदद से शुरू हुआ रेस्क्यू

सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम आवश्यक रेस्क्यू उपकरणों के साथ घटनास्थल पर पहुंची। तेज बहाव और कीचड़ के बीच टीम ने रबर बोट एवं रस्सियों की सहायता से बचाव अभियान शुरू किया। प्रशिक्षित जवानों ने सावधानीपूर्वक कार्रवाई करते हुए बाढ़ में फंसे दो पुरुषों, दो महिलाओं और एक बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाला।

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रेस्क्यू के दौरान एक बच्चा बेहोशी की हालत में पाया गया। उसके पेट में पानी चले जाने के कारण उसकी स्थिति गंभीर थी। एनडीआरएफ के मेडिकल ऑफिसर ने मौके पर ही प्राथमिक उपचार के साथ सीपीआर दिया। लगभग 10 मिनट तक किए गए प्रयास के बाद बच्चे ने सांस लेना शुरू किया और उसे होश आया। इसके बाद सभी पांच लोगों को एंबुलेंस की सहायता से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र साजा भेजा गया।

समन्वित कार्रवाई से सफल रहा मॉकड्रिल

मॉकड्रिल के दौरान जिला प्रशासन, एनडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य एवं राजस्व विभाग के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। कलेक्टर सुश्री प्रतिष्ठा ममगाईं ने रेस्क्यू किए गए लोगों से मुलाकात कर उनकी स्थिति की जानकारी ली और बचाव दल की त्वरित कार्रवाई की सराहना की।

उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा के समय प्रत्येक मिनट महत्वपूर्ण होता है। जिला प्रशासन और रेस्क्यू टीमों की तत्परता एवं बेहतर समन्वय से आपात स्थिति में जनहानि को कम किया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लें तथा बारिश के दौरान नदी, नाले और अन्य जलस्रोतों के आसपास जाने से बचें।

मानसून को देखते हुए पहले से की गई है तैयारी

एसडीआरएफ कमांडेंट ने बताया कि मानसून को ध्यान में रखते हुए जिले में पहले से ही रेस्क्यू बोट, लाइफ जैकेट, आवश्यक बचाव उपकरण और प्रशिक्षित गोताखोरों की टीम को तैयार रखा गया है। इसी तरह की मॉकड्रिल का उद्देश्य आपदा के समय उपलब्ध संसाधनों और टीमों की कार्यक्षमता को परखना तथा कम से कम समय में प्रभावित लोगों तक राहत एवं बचाव पहुंचाना है।

जिला प्रशासन ने की आमजन से अपील

जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि भारी बारिश के दौरान नदी, नाले, तालाब एवं अन्य जलस्रोतों के पास न जाएं। बच्चों को जलभराव वाले स्थानों से दूर रखें और उन्हें अकेले नदी-नालों के आसपास न जाने दें। किसी भी प्रकार की आपात स्थिति में तत्काल डायल 112 अथवा जिला कंट्रोल रूम को सूचना दें।

मॉकड्रिल के दौरान पुलिस अधीक्षक त्रिलोक बंसल, अपर कलेक्टर प्रकाश भारद्वाज, एसडीएम द्वय दीप्ति वर्मा एवं पिंकी मनहर सहित जिला प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व तथा आपदा प्रबंधन से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

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