आज की बदलती जीवनशैली में ब्लड शुगर का बढ़ना एक आम स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। मेडिकल भाषा में इसे हाइपरग्लाइसीमिया कहा जाता है। शरीर में अग्न्याशय इंसुलिन हार्मोन बनाता है, जो भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। जब इंसुलिन पर्याप्त मात्रा में नहीं बनता या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पातीं, तो ग्लूकोज खून में जमा होने लगता है और ब्लड शुगर बढ़ जाता है।
ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में खान-पान के साथ शारीरिक गतिविधि भी अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में सबसे आसान एक्सरसाइज मानी जाने वाली वॉकिंग को लेकर अक्सर सवाल होता है कि आखिर रोज कितनी देर चलना चाहिए।
रोज 30 मिनट तेज चाल से चलना फायदेमंद
डॉ. दिनेश कुमार, डायरेक्टर, इंटरनल मेडिसिन, फोर्टिस, ग्रेटर नोएडा के मुताबिक, नियमित शारीरिक गतिविधि ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। चलने के दौरान मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं, जिससे ब्लड शुगर मैनेजमेंट में फायदा मिल सकता है।
आमतौर पर स्वस्थ वयस्कों को सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि करने की सलाह दी जाती है। इसे रोजाना करीब 30 मिनट तेज चाल से चलने के तौर पर किया जा सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को लगातार 30 मिनट चलना मुश्किल लगता है, तो वह अपनी वॉक को छोटे हिस्सों में बांट सकता है। उदाहरण के लिए 10-10 मिनट के तीन सेशन पूरे दिन में किए जा सकते हैं।
डायबिटीज मरीजों के लिए खाने के बाद वॉक भी उपयोगी
डायबिटीज या बढ़े हुए ब्लड शुगर वाले लोगों के लिए भोजन के बाद थोड़ी देर टहलना भी उपयोगी हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार, खाना खाने के बाद 10 से 15 मिनट हल्की से मध्यम गति से चलना शरीर को ग्लूकोज के इस्तेमाल में मदद कर सकता है।
हालांकि हर व्यक्ति के लिए वॉक की अवधि और गति एक जैसी नहीं हो सकती। उम्र, वजन, फिटनेस, स्वास्थ्य स्थिति और ब्लड शुगर लेवल के आधार पर एक्सरसाइज का तरीका अलग-अलग हो सकता है।
वॉक करते समय इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
चलते समय अगर अत्यधिक थकान, चक्कर, कमजोरी या किसी तरह की असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाना चाहिए।
खास तौर पर डायबिटीज की दवा या इंसुलिन लेने वाले लोगों को एक्सरसाइज के दौरान ब्लड शुगर बहुत कम होने यानी हाइपोग्लाइसीमिया के जोखिम का ध्यान रखना चाहिए। ऐसे लोगों को अपनी एक्सरसाइज रूटीन डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
सिर्फ वॉकिंग से डायबिटीज कंट्रोल नहीं होती
यह समझना जरूरी है कि केवल वॉकिंग को डायबिटीज के इलाज का विकल्प नहीं माना जा सकता। ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से मैनेज करने के लिए संतुलित खान-पान, पर्याप्त नींद, वजन का प्रबंधन, डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं का सही इस्तेमाल और नियमित ब्लड शुगर मॉनिटरिंग भी महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए हर व्यक्ति को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार वॉक की अवधि और उसकी तीव्रता तय करनी चाहिए। खासकर डायबिटीज, अन्य बीमारी या दवा/इंसुलिन लेने की स्थिति में एक्सरसाइज रूटीन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।




