जनता की शिकायतों पर कितनी कार्रवाई? सीएम विष्णु देव साय ने 33 जिलों के कलेक्टरों के साथ की समीक्षा

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एमसीबी/रायपुर :  छत्तीसगढ़ में जनशिकायतों के समयबद्ध निराकरण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में सीएम हेल्पलाइन 1076 की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रदेश के सभी 33 जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान शिकायतों के निराकरण की स्थिति, लंबित प्रकरणों और समाधान की गुणवत्ता की समीक्षा पर जोर दिया गया।

जिला मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) के कलेक्ट्रेट स्थित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष से कलेक्टर संतन देवी जांगड़े सहित जिले के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में शामिल हुए। अधिकारियों में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अंकिता सोम, अपर कलेक्टर नम्रता आनंद डोंगरे तथा डिप्टी कलेक्टर इंदिरा मिश्रा और नेहा खलखो मौजूद रहीं।

समय-सीमा में शिकायतों का निराकरण करने पर जोर

बैठक का मुख्य उद्देश्य सीएम हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से प्राप्त जनशिकायतों के निराकरण की स्थिति की समीक्षा करना था। इसमें जिलावार शिकायतों, लंबित मामलों और शिकायतों के समाधान की गुणवत्ता जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

समीक्षा के दौरान शिकायतों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण करने और नागरिकों को उनकी समस्याओं से वास्तविक राहत दिलाने पर जोर दिया गया। शिकायतों के समाधान में संबंधित विभागों की सक्रिय भूमिका और जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया।

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शिकायतकर्ता की संतुष्टि भी अहम

सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से दर्ज शिकायतों का निपटारा केवल औपचारिक प्रक्रिया बनकर न रह जाए, बल्कि संबंधित नागरिक की समस्या का वास्तविक समाधान हो, यह व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है।

इसके लिए जिला स्तर पर शिकायतों की नियमित निगरानी, लंबित प्रकरणों की समीक्षा और की गई कार्रवाई की गुणवत्ता पर ध्यान देना आवश्यक है। शिकायतकर्ता को कार्रवाई की उचित जानकारी मिले और उसे समस्या के समाधान का लाभ प्राप्त हो, इस पहलू को भी महत्वपूर्ण माना गया।

शासन और जनता के बीच संवाद का माध्यम है हेल्पलाइन 1076

सीएम हेल्पलाइन 1076 छत्तीसगढ़ शासन की नागरिक-केंद्रित शिकायत निवारण व्यवस्था है। इसके माध्यम से आम नागरिक विभिन्न विभागों से जुड़ी समस्याएं और शिकायतें दर्ज करा सकते हैं तथा उनके निराकरण की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

शिकायत निवारण व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए नियमित समीक्षा, लंबित मामलों पर कार्रवाई और विभागीय जवाबदेही जरूरी है। इससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और नागरिकों की समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

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