पाण्डुका में पत्रकार को निशाना बनाने की आशंका से सनसनी, पुलिस जांच में जुटी; एक दशक से ज्वलंत मुद्दों पर खबरें उठाते रहे हैं हेमंत तिवारी
परमेश्वर राजपूत, गरियाबंद/छुरा: जिले के पाण्डुका थाना क्षेत्र में पत्रकार के घर के सामने खड़ी कार में आधी रात आग लगा दिए जाने की घटना से इलाके में सनसनी फैल गई। ग्राम पंचायत तौरेंगा के मौलीपारा निवासी एवं पत्रिका के पाण्डुका संवाददाता हेमंत कुमार तिवारी की कार को अज्ञात व्यक्ति द्वारा आग के हवाले किए जाने की बात सामने आई है। आग से कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के पीछे कौन है और आग किन परिस्थितियों में लगी, इसका अभी खुलासा नहीं हो सका है। पाण्डुका पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।घटना 7 सितंबर की मध्य रात्रि करीब 12 बजे की बताई जा रही है। हेमंत तिवारी की कार रोजाना की तरह उनके घर के सामने स्थित टीन शेड के नीचे खड़ी थी। रात में अचानक कार के सेंसर से सायरन जैसी आवाज आने पर उनकी नींद खुली। बाहर निकलकर देखने पर कार में आग धधकती दिखाई दी। उन्होंने तत्काल घटना की सूचना पाण्डुका थाना प्रभारी चिंताराम देशमुख को दी।सूचना मिलते ही थाना प्रभारी ने प्रधान आरक्षक प्यारी लाल साहू एवं पुलिस जवान अलीम को मौके पर भेजा। पुलिस जवानों तथा पड़ोसियों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया। आग की भयावह स्थिति को देखते हुए गरियाबंद फायर ब्रिगेड को भी सूचना दी गई। दमकल वाहन मालगांव तक पहुंच चुका था, लेकिन स्थानीय स्तर पर आग पर नियंत्रण की सूचना मिलने के बाद उसे वापस भेज दिया गया। घर में लगी बोर मशीन के पानी और पड़ोसियों की मदद से आग बुझाई गई।
एक दशक से ज्वलंत मुद्दों पर लिखते रहे हैं पत्रकार
हेमंत कुमार तिवारी पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे क्षेत्र में विभिन्न प्रकार की कथित गड़बड़ियों, अनियमितताओं और जनहित से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं। ऐसे में कार में आग लगाए जाने की घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, घटना के पीछे पत्रकारिता से जुड़ा कोई कारण है या फिर किसी व्यक्तिगत रंजिश के चलते वारदात को अंजाम दिया गया, यह पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पत्रकार की कार में आगजनी ने बढ़ाई चिंता
ग्रामीण क्षेत्र में पत्रकार के घर के सामने खड़े वाहन को आग के हवाले किए जाने की घटना ने पत्रकारों और आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि यह घटना जानबूझकर की गई है तो इसका उद्देश्य क्या था और इसके पीछे कौन लोग हैं, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है। पुलिस के सामने अब घटना के पीछे के कारणों का पता लगाने के साथ-साथ आरोपी तक पहुंचने की चुनौती है।
2011 में पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड की याद हुई ताजा
पाण्डुका की इस घटना ने करीब डेढ़ दशक पहले छुरा में हुए पत्रकार उमेश राजपूत हत्याकांड की याद भी ताजा कर दी है। जनवरी 2011 में 32 वर्षीय युवा पत्रकार उमेश राजपूत की उनके आमापारा स्थित निवास पर शाम करीब 6.30 बजे गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस घटना में भी शुरुआती जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी के जतमई रोड की ओर भागने की आशंका जताई थी। हालांकि अब तक पंद्रह साल बाद भी जांच एजेंसी इस घटना के अपराधियों को पकड़ने में असफल रही है।
अब जतमई मार्ग क्षेत्र में ही एक पत्रकार की कार को आधी रात आग के हवाले किए जाने की घटना सामने आने के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाएं आमतौर पर शहरों में सुनने को मिलती हैं, लेकिन अब ग्रामीण एवं अंचल क्षेत्र में भी इस तरह की वारदात चिंता का विषय है।
जतमई मार्ग की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना के बाद जतमई मार्ग और आसपास के क्षेत्र में लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि पुलिस को इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द आरोपी तक पहुंचना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
फिलहाल पाण्डुका पुलिस मामले की जांच कर रही है। कार में आग किसने लगाई, आगजनी का उद्देश्य क्या था और क्या यह घटना पत्रकारिता से जुड़ी किसी रंजिश का परिणाम है—इन सवालों के जवाब पुलिस जांच के बाद ही सामने आएंगे।




