288 वोट के समर्थन से लोकसभा से वक्फ संशोधन विधेयक पास हो चुका है। शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने प्रियंका गांधी के मतदान में हिस्सा न लेने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि प्रियंका को वोट डालना चाहिए था, क्योंकि उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है और उनके कदम से अन्य लोग भी प्रभावित होते।
मौलाना ने प्रियंका में इंदिरा गांधी की छवि देखने की बात कही और सवाल उठाया कि उन्होंने मतदान क्यों नहीं किया, उन्हें बताना चाहिए।
लोकसभा में देर रात 2 बजे वक्फ संशोधन बिल 2024 पारित हो गया, जिससे वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। बिल के पारित होते ही AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने विरोध जताते हुए सदन में बिल की कॉपी फाड़ दी। उन्होंने इसे मुसलमानों के अधिकारों पर हमला बताया। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह संशोधन पारदर्शिता बढ़ाने और वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
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विपक्षी दलों ने बिल का किया विरोध
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2024 (Waqf Amendment Bill 2024) पेश हो गया है। कांग्रेस ने इस दौरान जमकर हंगामा किया। गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर पलटवार किया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विधेयक पेश करते हुए जवाब दिया। सरकार जहां विधेयक को मुस्लिमों के हित में एक सुधारात्मक कदम बता रही तो वहीं विपक्ष पुरजोर विरोध में उतरा है। विपक्षी दलों का कहना है कि विधेयक संविधान का उल्लंघन है और धार्मिक आजादी के खिलाफ है। जानते हैं बिल पास होने से क्या कुछ बदलने वाला है।
वक्फ संशोधन बिल पास होने से क्या-क्या बदल जाएगा?
विधेयक के अनुसार, देशभर में अलग-अलग बने वक्फ ट्राइब्यूनल्स को मजबूत किया जाएगा। ट्राइब्यूनल्स में जज बनने के लिए एक मानक चयन प्रक्रिया तय की जाएगी। विवादों के समाधान के लिए समय सीमा तय की जाएगी। बता दें ये जानकारी पीटीआई एजेंसी के मुताबिक बताई जा रही है। वहीं, वक्फ संस्थाओं की ओर से अपनी अर्जित आय का 7 प्रतिशत वक्फ बोर्डों में अनिवार्य योगदान की सीमा घट जाएगी, इसे 7 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है।
हर साल करवाना होगा ऑडिट
जिन वक्फ संस्थाओं की सालाना आय 1 लाख रुपये से ज्यादा होगी, उन्हें अपने खातों को राज्यों की ओर से तय लेखा परीक्षकों की ओर से ऑडिट करवाना होगा। जिससे पैसों का समुचित प्रबंधन किया जा सके और उसमें कोई घोटाला न हो।
केंद्र सरकार की ओर से एक केंद्रीकृत पोर्टल बनाया जाएगा। उस पर वक्फ की गई संपत्तियों का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा। साथ ही उन संपत्तियों का मैनेजमेंट को पारदर्शी और दक्षता से संचालित किया जाएगा।
विधेयक में प्रस्ताव है कि अपनी संपत्ति को वही मुसलमान वक्फ घोषित कर सकते हैं, जो पिछले 5 साल से लगातार इस्लाम को प्रैक्टिस कर रहे हैं, यह नियम 2013 से पहले भी था, जिसे कांग्रेस की मनमोहन सिंह सरकार ने खत्म कर दिया था।
महिलाओं को देना होगा अनिवार्य हिस्सा
बिल में प्रावधान है कि किसी व्यक्ति को अपनी संपत्ति को वक्फ घोषित करने से पहले पत्नी, बेटी या बहन को उसका हिस्सा अनिवार्य रूप से देना होगा। जिससे संपत्ति चली जाने पर वह बेसहारा न हो जाए। इसके साथ ही साथ ही विधवाओं, तलाकशुदा महिलाओं और अनाथों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
विधेयक के अनुसार, अगर वक्फ बोर्ड किसी सरकारी जमीन पर दावा करेगा तो कलेक्टर से ऊपर का अधिकारी इसकी जांच करेगा। अगर वह दावे से संतुष्ट होगा तो ही वह प्रॉपर्टी वक्फ घोषित हो सकेगी वरना दावा खारिज हो जाएगा।
ट्रिब्यूनल की मनमानी पर लगेगी लगाम
बिल में यह भी प्रस्ताव है कि समावेशिता और जमीन पर दावे की निष्पक्ष जांच करने के लिए सेंट्रल और स्टेट वक्फ बोर्डों में गैर-मुस्लिमों को भी सदस्य के रूप में नॉमिनेट किया जाएगा।
पहले किसी मामले में वक्फ ट्रिब्यूनल का फैसला ही अंतिम होता था। अब ट्रिब्यूनल के फैसले से असंतुष्ट पक्ष 90 दिन के भीतर हाईकोर्ट में जा सकता है। वहां पर जमीन का मामला सामान्य मामलों की तरह चलेगा।
बोहरा और आगाखानी भी बना सकेंगे बोर्ड
बिल के मुताबिक, अब सिर्फ वही प्रॉपर्टी वक्फ की मानी जाएगी जो अभी तक उसके पास बिना विवाद के है। कोई ऐसी संपत्ति, जिस पर कोर्ट में सुनवाई चल रही हो या पुलिस में शिकायत दर्ज हो। वह तब तक वक्फ नहीं मानी जाएगी, जब तक उस पर अंतिम निर्णय न आ जाए। अब बिना बेटे और वसीयत के मरने पर वह संपत्ति अपने आप वक्फ की संपत्ति घोषित नहीं हो सकेगी बल्कि उस पर बेटियों का अधिकार माना जाएगा।
पहले केवल सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड होता था। नए बिल के बाद अब बोहरा और आगाखानी मुस्लिम अपना अलग से बोर्ड बना सकते हैं। ये अलग अलग धड़े अब दोयम दर्जे के मुसलमान नहीं रहेंगे।
एक ओर जहां केंद्र सरकार इस विधेयक को लोकसभा में पारित कराने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई, तो वहीं विपक्ष ने इस विधेयक को असंवैधानिक कहकर नकार दिया है। विपक्ष इस विधेयक के विरोध में है और विपक्षी नेता लगातार लोकसभा में इस विधेयक का विरोध करते हुए दिखाई दे रहे हैं। वहीं इस बीच हैदराबाद से सांसद और AMIM के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस विधेयक पर अपनी राय दी है। असदुद्दीन ओवैसी ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ मोदी सरकार पर जमकर भड़ास निकाली है। ओवैसी ने इस विधेयक को मुसलमानों के सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक अधिकारों पर सीधा हमला बोलने वाला बताया है। ओवैसी ने इस विधेयक को संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का सीधा उल्लंघन करार दिया है।
असदुद्दीन ओवैसी बोले - मैं गांधी की तरह वक्फ बिल को फाड़ता हूं…
ये बिल सिर्फ मुसलमानों को जलील करने के लिए लाया- ओवैसी
ओवैसी ने कहा कि ये विधेयक सिर्फ मुसलमानों को जलील करने के लिए लाया जा रहा है। बीजेपी इस विधेयक की मदद से मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को खत्म करने की साजिश रच रही है। ओवैसी ने सरकार के इस विधेयक पर हमला जारी रखते हुए आगे कहा, 'हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समुदायों की धार्मिक संपत्तियों को संरक्षण प्राप्त है, लेकिन मुस्लिम वक्फ की संपत्तियों को इस विधेयक के माध्यम से सरकार जब्त करना चाहती है।' ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार मुसलमानों की आर्थिक, शैक्षणिक प्रगति को रोकने के लिए मुस्लिम वक्फ संपत्तियों को इसलिए कमजोर कर रही है। ओवैसी ने बताया कि साल 2007 की सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में ये बताया गया था कि सिर्फ दिल्ली में 123 वक्फ संपत्तियों की बाजार कीमत 6000 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब सरकार इन संपत्तियों को हड़पने के लिए नए कानून बना रही है।
इस बिल में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन- ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर इस विधेयक के लाने के पीछे मुसलमानों को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित करने की मंशा बताई है। ओवैसी ने अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थानों के संचालन का अधिकार) का हवाला देते हुए कहा कि इस विधेयक से मुसलमानों को उनके धार्मिक संस्थानों पर प्रशासनिक अधिकार से वंचित करने की साजिश सरकार रच रही है। ओवैसी ने कहा कि इस विधेयक के लागू होने से वक्फ संपत्तियों पर कब्जे को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। ओवैसी ने इस बिल के लागू होने के बाद का एक उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने वक्फ संपत्ति पर कब्जा कर लिया, तो सरकार इस पर लिमिटेशन एक्ट लागू करेगी, जिससे रातों-रात अतिक्रमणकर्ता उस संपत्ति का कानूनी मालिक बन जाएगा। ओवैसी ने इसे न्याय के खिलाफ बताया और कहा कि ये विधेयक अतिक्रमण करने वालों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाया गया है।
ओवैसी का विधेयक को फाड़ने का ऐलान
ओवैसी ने इस दौरान अपने संबोधन के अंत में महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए दक्षिण अफ्रीका के नस्लवादी कानून के खिलाफ जिस तरह से गांधी जी ने अस्वीकार किया था, वही उदाहरण देते हुए ओवैसी ने कहा कि मैं भी इस विधेयक को खारिज करता हूं। ओवैसी ने कहा कि यह विधेयक असंवैधानिक है और मैं इसे संसद में ही फाड़कर विरोध दर्ज कर रहा हूं। ये कहते हुए ओवैसी ने वक्फ बिल की प्रति का पंच खीचकर निकाल दिया। ओवैसी ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाया कि वह धार्मिक ध्रुवीकरण करके देश में मंदिर-मस्जिद के नाम पर संघर्ष भड़काना चाहती है। ओवैसी ने इस दौरान अपने 10 संशोधन प्रस्ताव संसद में प्रस्तुत किए और मांग की कि सरकार इन प्वाइंट्स पर भी विचार करे।
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