रायगढ़ : राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी, कूटरचना और जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों पर न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी घरघोड़ा, माननीय दामोदर प्रसाद चंद्रा की अदालत ने पूर्व एसडीएम अशोक कुमार मार्बल, पटवारी परमेश्वर नेताम, जमीन विक्रेता बिहारी पटेल और विक्रय पत्र के गवाह सुरेन्द्र गुप्ता के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 420, 419, 467, 468, 471 एवं 120-बी के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना करने का आदेश थाना प्रभारी लैलुंगा को दिया है। यह आदेश लैलुंगा निवासी पीड़ित व्यापारी अशोक कुमार अग्रवाल द्वारा दायर क्रिमिनल कंप्लेंट (फाइलिंग नंबर 714/2024) पर सुनवाई करते हुए मिश्रा चेम्बर रायगढ़ के सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा और आशीष कुमार मिश्रा के विस्तृत तर्कों के बाद पारित किया गया।
जिंदल पावर एंड स्टील की भूमि में कथित हेराफेरी का मामला
आवेदन में दर्ज तथ्यों के अनुसार, वर्ष 2018 में घरघोड़ा में पदस्थ एसडीएम अशोक मार्बल और पटवारी परमेश्वर नेताम ने ग्राम झींकाबहाल स्थित जिंदल पावर एंड स्टील लिमिटेड की भूमि खसरा नंबर 208, रकबा 0.773 हेक्टेयर के संबंध में राजस्व रिकॉर्ड में कथित रूप से हेराफेरी की। आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने झूठी ऋण पुस्तिका क्रमांक P-1318403 तैयार की और खसरा एवं बी-1 अभिलेख में इस भूमि को बिहारी पटेल के नाम दर्शाया, जबकि वर्ष 2017 के राजस्व अभिलेखों में यह जमीन जिंदल पावर लिमिटेड के नाम दर्ज थी और कभी भी बिहारी पटेल के नाम पर नहीं रही। इन कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बिहारी पटेल ने 23 जनवरी 2018 को यह जमीन 11,84,000 रुपये में पीड़ित अशोक अग्रवाल को बेच दी। रजिस्ट्री भी इन्हीं दस्तावेजों पर आधारित होकर हो गई।
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फर्जी नामांतरण और फर्जी ऋण पुस्तिका का भी आरोप
खरीद-बिक्री के बाद, पीड़ित के नाम पर फर्जी नामांतरण और नई ऋण पुस्तिका क्रमांक P-2551631 जारी किए जाने का आरोप भी आवेदन में दर्ज है। सितंबर 2023 में जब पीड़ित ने जमीन का ऑनलाइन दस्तावेज निकाला, तो उक्त भूमि वेणुधर वल्द ईश्वर के नाम पर दर्ज दिखाई दी। इसके बाद की छानबीन में वर्ष 2017 के खसरे में जिंदल पावर लिमिटेड का नाम होना सामने आया, जिससे पीड़ित को पूरे प्रकरण की वास्तविकता का पता चला।
पुलिस द्वारा FIR दर्ज न होने पर न्यायालय की शरण
पीड़ित ने थाना लैलुंगा एवं एसपी रायगढ़ से शिकायत की थी, लेकिन आरोपी अधिकारियों में से एक स्वयं प्रशासनिक अधिकारी होने के कारण पुलिस पर कार्रवाई में हिचकिचाहट के आरोप भी लगाए गए। इस पर पीड़ित न्याय की उम्मीद लेकर न्यायालय पहुँचा, जहां मिश्रा चेम्बर रायगढ़ के सीनियर वकीलों ने पूरा प्रकरण विस्तार से रखा।अदालत ने दस्तावेजों की बारीकी से जांच और तर्क सुनने के बाद लगभग आठ पृष्ठों का विस्तृत आदेश जारी किया और थाना प्रभारी लैलुंगा को आरोपियों के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना कर अभियोग पत्र/अंतिम प्रतिवेदन अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।
पीड़ित और वकीलों की प्रतिक्रिया
आदेश पारित होने के बाद पीड़ित ने इसे न्याय और सत्य की जीत बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक तंत्र से न्याय की उम्मीद न होने पर उन्होंने अदालत की शरण ली थी और वह निर्णय से संतुष्ट हैं। सीनियर एडवोकेट अशोक कुमार मिश्रा और आशीष कुमार मिश्रा ने कहा कि यह आदेश भ्रष्टाचार में संलिप्त प्रशासनिक अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि कानून की नजर में सभी समान हैं और उच्च पद पर रहते हुए भी अपराध करने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती।
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पूर्व एसडीएम पर अन्य प्रकरण भी लंबित
मीडिया रिपोर्ट स्टेट अनुसार, एसडीएम अशोक मार्बल के विरुद्ध
भू-अर्जन घोटाले में अपराध दर्ज करने की कार्यवाही आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो (EOW) रायपुर में लंबित है।
बजरमुड़ा जमीन घोटाले में अपराध दर्ज करने का आदेश कलेक्टर रायगढ़ द्वारा घरघोड़ा के अनुविभागीय अधिकारी को दिया जा चुका है।
इसी कारण वे कई दिशाओं से गंभीर आरोपों से घिरे हैं और विभागीय उच्च अधिकारी भी उनके विरुद्ध आगे की कार्रवाई प्रारंभ कर चुके हैं।



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