नगरी में बेमौसम बारिश से धान की फसल तबाह! खेतों में बिछी फसल, किसानों ने मांगा मुआवजा

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नगरी : धमतरी जिले के नगरी ब्लॉक में लगातार दो दिनों से हो रही बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पककर तैयार धान की फसल को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। कई खेतों में खड़ी फसल जमीन पर बिछ गई है, जबकि कटाई के बाद खेतों में पड़ी धान की फसल बारिश के पानी में डूब गई है। इससे किसानों के सामने फसल बचाने के साथ-साथ धान बेचने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।

किसानों का कहना है कि सालभर की मेहनत और खेती में लगाई गई लागत पर बेमौसम बारिश ने पानी फेर दिया है। अब वे प्रशासन से प्रभावित खेतों का सर्वे कराकर नुकसान के आकलन और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

कहीं कटी फसल डूबी, तो कहीं खेतों में गिरा धान

बारिश और तेज हवाओं के कारण किसानों को अलग-अलग तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिन खेतों में धान की कटाई हो चुकी है, वहां कटी फसल पानी में भीग रही है। किसानों को आशंका है कि लगातार नमी बनी रहने से धान अंकुरित हो सकता है और उपज की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

वहीं, जिन खेतों में धान अभी खड़ा है, वहां तेज हवा के कारण फसल जमीन पर गिर गई है। ऐसी फसल को सूखने में अधिक समय लग सकता है। किसानों को दाने झड़ने और उपज खराब होने की भी चिंता सता रही है।

धान खरीदी केंद्रों में रिजेक्शन का डर

फसल को हुए नुकसान के साथ किसानों को धान बेचने के दौरान भी परेशानी की आशंका है। किसानों के मुताबिक, बारिश में भीगने से धान का रंग और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। दानों पर काले निशान पड़ने, चमक कम होने और नमी बढ़ने की स्थिति में खरीदी केंद्रों पर धान की जांच को लेकर उन्हें चिंता है।

किसानों का कहना है कि यदि गुणवत्ता या नमी के आधार पर धान अस्वीकार किया गया अथवा कटौती हुई, तो उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से मांग की है कि बारिश से प्रभावित किसानों की स्थिति को ध्यान में रखते हुए धान खरीदी के दौरान उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

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किसान मोती लाल कश्यप की 6 एकड़ फसल प्रभावित

ग्राम ठेंनही के किसान मोती लाल कश्यप, पिता अर्जुन कश्यप, ने बताया कि उनकी 2 एकड़ जमीन की धान की फसल कट चुकी है, जो बारिश के पानी में डूब गई है। इसके अलावा 4 एकड़ में खड़ी धान की फसल तेज हवा के कारण खेत में गिर गई है।

किसान के अनुसार, क्षेत्र के अन्य किसानों की फसलें भी प्रभावित हुई हैं। हालांकि, कुल कितने किसानों और कितने रकबे में नुकसान हुआ है, इसका आकलन राजस्व विभाग के सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

जनपद सदस्य ने सर्वे और मुआवजे की उठाई मांग

मेचका क्षेत्र के जनपद सदस्य श्रीधन सोम ने बारिश से प्रभावित खेतों का राजस्व विभाग की टीम से निरीक्षण कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खड़ी, गिरी हुई और कटाई के बाद खेतों में पड़ी फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराया जाना चाहिए, ताकि प्रभावित किसानों को नियमानुसार उचित मुआवजा मिल सके।

उन्होंने धान खरीदी केंद्रों पर भी किसानों को राहत देने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि बारिश से प्रभावित धान की गुणवत्ता और नमी को ध्यान में रखते हुए किसानों की समस्याओं का संवेदनशीलता से समाधान किया जाना चाहिए।

फिलहाल, किसानों की नजर प्रशासनिक सर्वे और मुआवजे को लेकर होने वाली कार्रवाई पर है। प्रभावित खेतों का वास्तविक नुकसान और सहायता की पात्रता आधिकारिक निरीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

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